भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट(सीईटीए) लागू होने से आगरा के जूता निर्यातकों के लिए ब्रिटेन के बाजार के दरवाजे पूरी तरह खुल गए हैं। भारतीय चमड़ा और फुटवियर उत्पादों पर लगने वाला 16 प्रतिशत तक का आयात शुल्क अब समाप्त हो गया है, जिससे एमएसएमई क्षेत्र और लाखों श्रमिकों को बड़ा लाभ होगा।
जूता एवं चमड़ा उद्योग विकास परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि देश के सबसे बड़े फुटवियर केंद्र आगरा के निर्यातकों को इस समझौते से वैश्विक बाजार में नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट्स के अनुसार, इससे भारत की 99% टैरिफ लाइनों को तत्काल ड्यूटी-फ्री पहुंच मिल गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से ब्रिटेन को 419.67 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ था। सीईटीए के प्रभाव से अगले तीन वर्षों में 1 से 1.5 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त निर्यात का अनुमान है। साथ ही, सेल्फ-सर्टिफिकेशन की सुविधा से निर्यातकों की दस्तावेजी प्रक्रिया भी बेहद आसान हो जाएगी।
खराब हालात के बीच उम्मीद की किरण
आगरा फुटवियर मैन्युफैक्चर्स एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के हालात से निर्यात प्रभावित हो रहा है। यूके से हुए समझौते से निर्यात बढ़ेगा। हम इसे उम्मीद की किरण की तरह देख रहे हैं। आगरा से करीब 4,000 करोड़ का सालाना निर्यात है। युद्ध के कारण लॉजिस्टिक्स महंगा हो गया है। ऐसे में यूके से करार से सिर्फ निर्यातक नहीं कारीगरों को भी लाभ होगा।