अनाज की कालाबाजारी के मामले में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी फर्म के मालिक और मुख्य आरोपी के टेंडर समझौता बैठक में शामिल होने के मामले में खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा ने जांच शुरू कर दी है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद विभागीय अधिकारियों ने बैठक में मौजूद रहे ठेकेदारों को नोटिस देकर जवाब-तलब किया है।
बैठक में सिर्फ टेंडर डालने वाली फर्म के मालिक या उनके अधिकृत प्रतिनिधि ही शामिल हो सकते हैं। ऐसे में इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है कि फर्म मालिक बैठक में शामिल था या नहीं। सभी पक्षों से प्रकरण से संबंधित वीडियो या अन्य साक्ष्य मांगे गए हैं। बता दें, मैनपुरी निवासी मुख्य आरोपी जितेंद्र कुमार गुप्ता की फर्म पर पूर्व में खाद्यान्न की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी करने का आरोप लगा था। इसके बाद थाना करहल में आवश्यक वस्तु अधिनियम (एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट) के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया।
इसी आधार पर फर्म को काली सूची में डाला गया। आरोप है कि गुप्ता ने अपने भतीजों के नाम पर फर्मों का जाल बुना और टेंडर के लिए आवेदन कर दिया। शासनादेश की अनदेखी करते हुए विभाग ने ब्लैकलिस्टेड ठेकेदार के रिश्तेदारों के नाम पर बनाई गई डमी फर्मों को 5.50 करोड़ रुपये के टेंडर सौंप दिए। इस दौरान संपर्क के लिए दर्ज मोबाइल नंबर भी समान होने के आरोप लगे लेकिन अफसरों ने इस बात को खारिज करते हुए मोबाइल नंबर अलग होने का दावा किया। अब टेंडर नेगोसिएशन प्रक्रिया के दौरान फर्म मालिक के मौजूद रहने के मामले में जांच शुरू हो गई है।
(आरएफसी) क्षेत्रीय खाद्य नियंत्रक विजय कुमार ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से इस प्रकरण में विस्तृत जांच कर रिपोर्ट तलब की गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।