डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क परिसर में तीन अप्रैल को छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ और लूटपाट की घटना में एक ओर पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही तो दूसरी तरफ सियासत तेज होती जा रही है।
पहले एबीवीपी और एनएसयूआई पहले से कूदे हुए हैं। अब समाजवादी छात्र सभा भी मैदान में उतर आई है। उसने मुकदमा वापसी की मांग उठाई है।
विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर ने छात्रा के बयान के आधार पर हरीपर्वत थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस संबंध में समाजवादी पार्टी छात्रसभा महानगर की ओर से मंगलवार को चीफ प्रॉक्टर मनोज श्रीवास्तव को ज्ञापन दिया।
छात्रा के आरोप पर सवाल खड़ा करते हुए मुकदमा वापस लिए जाने की मांग की। वह भी तब जबकि पुलिस की जांच अभी जारी है। छात्रा कई बार कह चुकी है कि उसके साथ घटना हुई है।
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छात्रसभा के महानगर अध्यक्ष निर्वेश शर्मा ने ज्ञापन में कहा है कि छात्रा ने पांच छात्र नेताओं पर छेड़छाड़ और चेन लूटने का आरोप लगाया। विश्वविद्यालय ने पीड़ित की बात सुनकर बिना जांच पड़ताल के एफआईआर दर्ज करा दी।
उन्होंने साक्ष्य दिए जाने की बात कहते हुए दावा किया है कि छात्रा ने उस दिन चेन नहीं पहनी थी। यह अपेक्षा की है कि छात्रा चेन का बिल, कहां से खरीदा था और छेड़खानी के साक्ष्य सभी सामने बताए।
यदि कोई साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर पा रही है तो विश्वविद्यालय को एफआईआर वापस लेना चाहिए और उन पांचों को आरोप मुक्त कराए।
छात्रा पीड़ित है, फिर केस झूठा कैसे
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समाजवादी पार्टी छात्रसभा के महानगर अध्यक्ष ने ज्ञापन के माध्यम से चीफ प्रॉक्टर से मुकदमा वापस लेने की मांग की है। चेन लूट के आरोप पर सवाल भी खड़ा किया है।
जबकि उन्होंने खुद ज्ञापन में छात्रा को पीड़ित ही लिखा है। वह भी एक नहीं, कई जगहों पर। अब सवाल यह है कि जब छात्रा पीड़ित है, तो केस झूठा कैसे हो सकता है?