ताज संरक्षित क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों की क्षमता विस्तार पर लगे प्रतिबंध के संदर्भ में चेंबर भवन में सोमवार को अध्यक्ष राजीव अग्रवाल की अध्यक्षता में मंथन किया गया। इसमें कहा गया कि चार वर्षों में होटल, हॉस्पिटल और जूता उद्योग नहीं लग सके हैं।
अध्यक्ष ने बताया कि 8 सितंबर 2016 को आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, एटा हाथरस एवं भरतपुर में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों की स्थापना और विस्तार (व्हाइट श्रेणी को छोड़कर) पर रोक लगा दी थी। प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को भेजे गए मेल के माध्यम से इस स्थिति के समाधान के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।
पर्यावरणीय सुरक्षा एवं प्रदूषण नियंत्रण प्रकोष्ठ के चेयरमैन नरेंद्र तनेजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उद्योगों की स्थापना पर कोई रोक नहीं लगाई गई है बल्कि पर्यावरण एवं गैर प्रदूषण कारी उद्योगों दोनों की बात को ही आगे बढ़ाने के लिए कहा है।
होटल, हॉस्पिटल, जूता उद्योग आदि योजनाएं पिछले 4 वर्षों से नहीं लग सकी हैं, जिससे उद्यमी और युवा शक्ति का पलायन शहर से हो रहा है। उपाध्यक्ष राजेंद्र गर्ग ने कहा कि आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार की गई अध्ययन रिपोर्ट की सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाए। इसमें उद्योगों को नहीं, सड़कों पर यातायात प्रबंधन को दोषी ठहराया गया है।