उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने कहा कि रेलवे अब आगरा-दिल्ली लाइन के बीच क्षमता बढ़ाने का काम कर रहा है। इसके लिए मथुरा से तीसरी और चौथी लाइन का काम किया जा रहा है। जीएम सक्सेना शुक्रवार की शाम को पलवल से आगरा कैंट स्टेशन तक निरीक्षण करने आए थे।
कैंट स्टेशन पर पत्रकारों से बातचीत में बताया कि आगरा मंडल में निरीक्षण के साथ ही आझई मथुरा और फरह से आगरा कैंट खंड के बीच स्पीड ट्रायल भी किया गया। चूंकि इस रेल लाइन पर सर्वाधिक तेज गतिमान एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों का संचालन किया जाता है इसलिए इस ट्रैक के अनुरक्षण को चेक किया गया। रेल बजट के मुद्दे पर उनका कहना था कि रेलवे के पास डेवलपमेंट फंड की कमी है। हमारा पूरा जोर संरक्षा और सुरक्षा पर है। ट्रैक की सुरक्षा के सवाल पर कहा कि निरंतर पेट्रोलिंग की जाती है। इसके अलावा उत्तर रेलवे में आनलाइन पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के सफल रहने पर ट्रैकों की सुरक्षा के लिए लोगों पर निर्भरता कम होगी।
गधापाड़ा स्थित ट्रेनिंग सेंटर में पहले चरण में तकनीशियनों को ट्रेनिंग देना शुरू होगा। इसमें कई तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में बताया कि पार्सल विभाग में सुधार के लिए भी एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही। इस दौरान डीआरएम प्रभाष कुमार, एडीआरएम दिलीप कुमार सिंह, सीपीआरओ बिजय कुमार, पीआरओ अमित मालवीय, डीसीएम नीरज भटनागर आदि मौजूद रहे।
जांच एजेंसियों को फोटो और वीडियो फुटेज दिए
पुखरायां (कानपुर) रेल हादसे पर कहा कि इसकी जांच कई स्तरों पर की जा रही है। अभी तक रेलवे की ओर से जांच एजेंसियों को 1500 फोटोग्राफ्स और लगभग इतने ही वीडियो फुटेज मुहैया कराए जा चुके हैं। रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर भी जांच कर रहे हैं। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
स्पेशल ट्रेन से लिया जायजा
जीएम ने स्पेशल ट्रेन से पलवल से निरीक्षण शुरू किया। रूंधी के यार्ड, रेलवे कालोनी, स्टेशन व रिले रूम को देखाष माइनर ब्रिज, आझई मथुरा जंक्शन स्टेशनों के साथ ही रेल पथ, प्वाइंट्स, सिग्नल प्रणाली, कर्व, समपार फाटकों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने भी उन्हें ज्ञापन सौैंपे।
अनुकंपा नियुक्ति के मामले में पीड़िता मिली
आगरा कैंट स्टेशन पर ईदगाह कालोनी की कुसुम देवी ने जीएम को अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी की शिकायत की। उन्होंने बताया कि पति की पिछले साल मृत्यु के बाद छोटे पुत्र राहुल सिंह ने आवेदन किया था। कर्मचारियों की लापरवाही के कारण पांच माह बाद भी दोनों में से एक बेटे की नौकरी नहीं लग सकी है। जीएम ने डीआरएम को जांच के आदेश दिए।