रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए बिझामई में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण पर विवाद शुरू हो गया है। दूसरे चरण में आठ हेक्टेयर जमीन का बैनामा पुरानी सर्किल रेट पर करने के लिए काश्तकार तैयार नहीं हो रहे। इस वजह से आगरा में भूमि आवंटन शुरू नहीं हो पा रहा। उधर, लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़ में रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए भूमि नहीं मिल रही।
सूबे में औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (एकेआईसी) योजना पर काम चल रहा है। इसके तहत प्रदेश में दो इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी) झांसी, चित्रकूट, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा के बिझामई में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। सदर तहसील के बिझामई में दो चरण में डिफेंस कॉरिडोर के लिए भूमि की खरीद की गई। पहले चरण में 40 हेक्टेयर भूमि की खरीद हो चुकी है। दूसरे चरण में 80 में 72 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा चुकी है। बाकी 8 हेक्टेयर भूमि का बैनामा किसान पुरानी सर्किल रेट पर करने के लिए तैयार नहीं हो रहे। 18 अगस्त को नए सर्किल रेट लागू हुए। बिझामई में 2 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर जमीन महंगी हो गई है।
जिला प्रशासन ने किसानों से पहले 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर में जमीन खरीद की थी। अब किसान नए सर्किल रेट के अनुसार 42 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का मुआवजा मांग रहे हैं। इस वजह से आगरा डिफेंस कॉरिडोर में भूमि आवंटन अधर में फंस गया है। आगरा में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने रडार बनाने की फैक्टरी लगाने के लिए 60 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की थी। ऐसे में छह महीने बाद भी भूमि आवंटन व कब्जा प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पा रही। लखनऊ, झांसी, कानपुर, अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर में निवेश शुरू हो चुका है। वहीं इस संबंध में डीएम अरविंद एम बंगारी का कहना है कि जो किसान बैनामा नहीं कर रहे उनकी प्रतिकर राशि कोर्ट में जमा कराई जाएगी। भूमि अधिग्रहण के माध्यम से जमीन खरीद प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।