रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम न लगाने और बिना प्रशासनिक अनुमति के धड़ल्ले से भूजल निकालने वाली औद्योगिक इकाइयों को अब पानी की कीमत चुकानी होगी। प्रशासन ने जल संसाधनों का दोहन कर मुनाफा कमाने वाले उद्योगों को गिरते जल स्तर को सुधारने की सीधी जिम्मेदारी देने की तैयारी कर ली है। नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐसे उद्योगों को जिले के सूखे तालाबों के जीर्णोद्धार व देखरेख का जिम्मा सौंपा जाएगा। प्रशासन ने इसके लिए कदमताल शुरू कर दी है।
दरअसल, गंगाजल, अमृत सरोवर और स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के बाद भी आंकड़ों में नतीजे निराशाजनक रहे हैं। प्री-मानसून की जांच में भूगर्भ जलस्तर दो मीटर तक गिरा है। हाल ही में आई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। वहीं, दो स्लॉटर हाउस व कुछ अन्य इकाइयों की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वह न तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाकर भूजल रीचार्ज सुनिश्चित कर रहे हैं, न ही भूजल के दोहन के लिए भूगर्भ जल विभाग ने उन्होंने अनुमति ली है।
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जिलाधिकारी ने दिए ये निर्देश
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने पहले ही ऐसे उद्योगों को चिह्नित कर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना और एनओसी लेना सुनिश्चित करने के लिए भूगर्भ जल विभाग को निर्देश दे दिए हैं। इसके साथ ही अब डीएम ने सीडीओ प्रतिभा सिंह को शुरुआती दाैर में ऐसे बीस तालाबों को चिह्नित कर सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं जो सूख चुके हैं।
डीएम ने कहा कि आगरा में सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। ऐसे में भूजल के स्तर में सुधार के लिए बड़े और कड़े कदम उठाने जरूरी हैं। कहा कि हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान को नियमों का पालन करना ही होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों को तालाबों की देखरेख का जिम्मा सौंपा जाएगा। इसका हर महीने प्रशासनिक अधिकारियों की टीम रिव्यू करेगी।