किनारी बाजार में भवन गिरने की घटना के बाद आगरा नगर निगम अलर्ट हो गया है और 68 अति-जर्जर भवनों को गिराने की तैयारी कर रहा है। नोटिस के बावजूद कार्रवाई न करने पर निगम पुलिस के साथ मिलकर खुद ध्वस्तीकरण करेगा।
आगरा के किनारी बाजार में बृहस्पतिवार रात जर्जर भवन के भरभराकर गिरने की घटना ने नगर निगम प्रशासन की नींद उड़ा दी है। मानसून से पहले खतरे को देखते हुए निगम ने शहर के 68 अति-जर्जर भवनों को जमींदोज करने का निर्णय लिया है। जल्द ही इन भवनों के मालिकों को भवन को गिराने या उसकी मरम्मत कराने के लिए अंतिम नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद भी अगर भवन मालिक ने तय समय में कोई कार्रवाई नहीं की, तो निगम प्रशासन पुलिस के साथ मिलकर खुद भवन ध्वस्त करेगा।
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किनारी बाजार
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम के पास पहले से ही अति जर्जर 68 भवनों की सूची है, लेकिन विभागीय सुस्ती के कारण इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बृहस्पतिवार रात हुई घटना के बाद निगम अधिकारी सक्रिय हो गए। नगर आयुक्त के निर्देश पर संबंधित अधिकारियों ने अब उन भवनों को प्राथमिकता पर रखा है, जिनकी स्थिति बेहद खतरनाक है और जो कभी भी धराशायी हो सकते हैं।
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किनारी बाजार
- फोटो : अमर उजाला
कार्यवाहक मुख्य अभियंता सिविल अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि कोतवाली व रकाबगंज में ही 48 ऐसे भवन चिह्नित हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। इन सभी के मालिकों को सख्ती से चेताया जाएगा। इसके बाद निगम आगे की कार्रवाई शुरू कर देगा।
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आगरा का किनारी बाजार
- फोटो : अमर उजाला
निगम फिर करेगा सर्वे
निगम की कार्रवाई केवल पुरानी सूची तक ही सीमित नहीं रहेगी। निगम प्रशासन ने पुराने शहर में और भी खतरनाक भवनों को चिह्नित करने के लिए नए सिरे से सर्वे शुरू करने की तैयारी की है। सर्वे के माध्यम से उन घरों की पहचान की जाएगीए जिनकी नींव बरसात के पानी के कारण कमजोर हो चुकी है। निगम की टीम गलियों में घूमकर भवनों की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी।
भवन स्वामियों से होगा सीधा संवाद
जर्जर भवन गिरने की घटना दोबारा न हो इसके लिए नगर निगम प्रशासन भवन स्वामियों के साथ संवाद स्थापित करेगा। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस देने के बावजूद कई लोग मकान खाली नहीं कर रहे हैं, जो जान-माल के लिए बड़ा खतरा है। प्रशासन अब पुलिस और स्थानीय प्रशासन की मदद से असुरक्षित ढांचों को हटाने की दिशा में काम करेगा।