आगरा के भैरों बाजार में बैंक के ढहने के बाद क्षेत्रीय लोगों ने एडीए, नगर निगम और खनन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप लगाया कि जर्जर भवन और मकानों को बिल्डर खरीदकर माॅल और दुकानें बना रहे हैं। नियमों की अनदेखी हो रही है। जिस मॉल की वजह से हादसा हुआ, उसमें डेढ़ महीने पहले बेसमेंट की खुदाई के दाैरान जमीन से पानी निकल आया था। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने संज्ञान नहीं लिया और हादसा हो गया।
क्षेत्रीय निवासी अपूर्व शर्मा ने आरोप लगाया कि एडीए में सेटिंग का खेल चल रहा है। काम के दौरान जमीन को इतना खोदा गया कि जमीन से पानी निकल आया। पानी निकालने के लिए बिल्डर ने उसे सड़क पर बहा दिया। इसके बावजूद संबंधित विभागों ने कोई जानकारी नहीं ली। बैंक के बगल में 40 फीट तक खुदाई की गई। भैरों बगीची के लोगों ने बताया कि रात में मशीन चलने से उनके घरों में लगता है कि भूकंप आ गया है। बिल्डर होने की वजह से कोई कुछ बोलता नहीं है। रात में बड़े वाहनों से मलबा भी हटाया जाता है। कार्यस्थल पर ही निर्माणाधीन माॅल के प्रोजेक्ट का बोर्ड भी लगाया गया है।
दहशत में आ गए दुकानदार
चंद्रशेखर ने बताया कि बैंक के सामने ही उनकी सैलून की दुकान है। वह दुकान में बैठे हुए थे। अचानक तेज आवाज आई। इससे डर गए। काफी देर तक बैंक के पास नहीं गए। बाद में पुलिस के आने पर देखा। पता चला कि बैंक का भवन ढह गया। कर्मचारी बाहर की तरफ भाग रहे थे।
ग्राहकों को सताई लाॅकर की चिंता
ग्राहक मीरा ने बताया कि 40 साल से बैंक में लाॅकर है। हादसे की जानकारी पर वो आईं। उन्हें बैंककर्मियों ने लाॅकर के सही होने के बारे में बताया। तब वो वापस गईं। गांधी नगर निवासी अनुराग भी अपने भाई के साथ पहुंचे। उनका बैंककर्मियों से विवाद हो गया। वह अपना लाॅकर देखना चाहते थे। मगर हादसे की वजह से बैंक में नहीं जाने दिया। इसी तरह कई और लोग भी लॉकर की चिंता में पहुंचे और इधर-उधर भटकते दिखे।
पुलिस तैनात, काम रहेगा प्रभावित
उधर, हादसे की वजह से बैंक में काफी दिन काम प्रभावित रह सकता है। बगल में बेसमेंट की खुदाई की वजह से काम करना सुरक्षित नहीं है। उधर, मलबे में बैंक से संबंधित दस्तावेज और कंप्यूटर भी दब गए। बाद में कर्मचारियों ने बाकी दस्तावेजों को बाहर निकाला। हालांकि लाॅकर और करेंसी चेस्ट सुरक्षित हैं। बैंक के बाहर सुरक्षा के लिए पुलिस को तैनात किया गया है।