दो दिन पहले आगरा के प्राचीन प्राथमिक कन्या विद्यालय, जगदीशपुरा की कक्षा तीन की छात्रा खुशी द्वारा स्कूल में शौचालय न होने पर नाम कटवाने को लेकर प्रधानाध्यापिका को लिखे पत्र के समर्थन में अन्य छात्राएं भी आ गई हैं।
उन्होंने भी विद्यालय से नाम कटवाने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि खुशी के इस फैसले से हम सबमें भी साहस जागा है। अब बिना शौचालय के विद्यालय में नहीं पढ़ेंगे।
विद्यार्थियों ने बताया कि विद्यालय में सिर्फ शौचालय न होने के कारण ही परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ रहा है बल्कि यहां बैठने के लिए भवन भी नहीं है। मजबूरन खुले आसमान के नीचे जमीन पर पड़े ईंट पत्थरों पर बैठना पड़ता है, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगती।
विद्यालय परिसर किराये की जमीन पर है। एक तरफ केमिकल के ड्रमों की सफाई का काम होता है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां मिड डे मील भी चूल्हे पर पकता है।
चूल्हे का धुआं आंखों में चुभता है। बता दें कि यहां वर्तमान में प्राथमिक में 49 विद्यार्थी ( 35 लड़कियां, 14 लड़के) और जूनियर में 24 (17 लड़कियां, 7 लड़के) पंजीकृत हैं।
सांसद ने दिया था धरना
मामले में प्रधानाध्यापिका अलका पालीवाल का कहना है कि विद्यालय में शौचालय नहीं होने पर पिछले सत्र में चार छात्राएं पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। अब खुशी के फैसले के समर्थन में अन्य छात्राएं भी आ गई हैं। प्रशासन से कई बार यहां सुविधाएं दुरुस्त करने की बात कही है, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने दिसंबर में विद्यालय का निरीक्षण किया था। वह विद्यालय की अव्यवस्थाएं देख भड़क गए थे। अपनी ही सरकार में उन्हें विद्यालय में धरना देना पड़ा था, लेकिन उसके बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों इस ओर ध्यान नहीं दिया।