नगर निगम में नगरायुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर विवाद बढ़ गया, जिसके विरोध में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने पार्षदों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि मांगें न मानी गईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
आगरा नगर निगम सदन की बैठक में महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह की अध्यक्षता में सोमवार को नगरायुक्त के विरुद्ध लाए गए निंदा प्रस्ताव के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कार्रवाई से नाराज निगम अधिकारियों और कर्मचारियों ने मंगलवार को मोर्चा खोलते हुए हाथों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया और नगरायुक्त के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने दो-टूक कहा कि पार्षदों का तानाशाही रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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निगम कर्मचारियों ने बताया कि 23 मार्च को प्रस्तावित साधारण सदन की बैठक को लेकर महापौर कार्यालय से स्पष्ट दिशा-निर्देश न मिलने के कारण असमंजस की स्थिति बनी थी। निगम प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि प्रशासनिक और विधायी कारणों से निर्धारित तिथि पर सदन बुलाना संभव नहीं है। कर्मचारियों का तर्क है कि नियमानुसार 31 मार्च से पहले बजट पारित कराना अनिवार्य है ताकि शहर के विकास कार्य न रुकें, लेकिन इस महत्वपूर्ण विषय पर महापौर कार्यालय से कोई ठोस निर्देश प्राप्त नहीं हुए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में संसद सत्र चल रहा है। शासन के आदेश के अनुसार, ऐसे समय में उन बैठकों का आयोजन सामान्यतः नहीं किया जाता जिनमें सांसद या विधायक सदस्य के रूप में नामित हों। इसके अलावा 23 मार्च को ही उत्तर प्रदेश विधानमंडल की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति की महत्वपूर्ण बैठक भी आगरा में प्रस्तावित थी। जिलाधिकारी कार्यालय के निर्देशानुसार, इस बैठक में जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य थी।
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कर्मचारियों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
कर्मचारी-अधिकारी एकता के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने नगरायुक्त के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास जताया। कहा कि नियम विरुद्ध तरीके से लाया गया यह निंदा प्रस्ताव अधिकारियों का मनोबल गिराने वाला है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पार्षदों और महापौर के व्यवहार में सुधार नहीं हुआ और इस प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। विरोध प्रदर्शन के कारण दिनभर निगम का कामकाज भी प्रभावित रहा।