आगरा के बाबरपुर में नगर निगम की जमीन पर कथित अवैध निर्माण के मामले में टीम ने दीवार ढहा दी और काम रुकवा दिया। निर्माण कराने वाले ने ग्राम प्रधान से आवासीय पट्टा मिलने का दावा किया, लेकिन निगम के अनुसार मांगने पर दस्तावेज नहीं दिखाए गए।
ककरैठा की तरह बाबरपुर में गाटा संख्या 1/1 की खाली पड़ी सरकारी जमीन पर आवासीय पट्टे का हवाला देते हुए अवैध निर्माण कर लिया गया। नगर निगम का बोर्ड भी उखाड़ दिया। मंगलवार को नगर निगम की टीम ने भूपेंद्र की ओर से बनवाई जा रही दीवार को ध्वस्त करा दिया। साथ ही अवैध निर्माण करने से रोक दिया।
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निगम की कार्रवाई का महिलाओं ने विरोध किया। दावा किया कि ग्राम प्रधान ने उनके नाम पट्टा कर दिया था। सहायक नगर आयुक्त श्रद्धा पांडेय ने बताया कि बाबरपुर स्थित गाटा संख्या 1/1 की भूमि पर लगातार कब्जे के प्रयास किए जा रहे हैं। निगम ने अपने स्वामित्व का बोर्ड भी लगवाया था लेकिन भू-माफिया ने बोर्ड को उखाड़कर फेंक दिया।
नगर निगम की ओर से थाना हरीपर्वत में तहरीर दी गई थी। उन्होंने बताया कि भूपेंद्र नामक के व्यक्ति की ओर से अवैध निर्माण करने पर राजस्व निरीक्षक शालिनी सिंह टास्क फोर्स के साथ तत्काल मौके पर पहुंचीं। टीम ने निर्माण कार्य रुकवाते हुए अवैध रूप से बनाई जा रही दीवार गिरा दी।
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नहीं दिखाए पट्टे के कागजसहायक नगर आयुक्त ने बताया कि अवैध निर्माण करने वाले भूपेंद्र ने दावा किया कि ग्राम प्रधान द्वारा जारी किया गया आवासीय पट्टा उसके पास है। पट्टे का कागज मांगा तो नहीं दिखाया। उन्होंने कहा कि किसी भी भूमि पर स्वामित्व या पट्टे का दावा करने मात्र से निर्माण या कब्जा करने का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। संबंधित दस्तावेज की जांच और भूमि की वास्तविक स्थिति का सत्यापन आवश्यक है।
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि बाबरपुर में जमीन पर दावा करने वाले से अभिलेख मांगे हैं। दीवार गिरा दी गई है। दस्तावेज की जांच के बिना किसी को भी सरकारी जमीन पर निर्माण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।