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थाने में न लिखी जाए FIR तो चुनें ये रास्ता, पुलिस को दर्ज करना ही पड़ेगा केस

Tue, 20 Feb 2018 04:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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up police - फोटो : अमर उजाला
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अगर पुलिस आपकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करती है, तो आपके पास एक और रास्ता है। आप कोर्ट में गुहार लगा सकते हैं। यह कारगर साबित हो रहा है। 
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क्रिमिनल प्रोसिजर कोड (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) में इसका प्रावधान है कि अगर पुलिस तहरीर मिलने पर केस न लिखे तो कोर्ट उसे आदेश दे सकती है। लगभग रोजाना ही ऐसे आदेश जारी भी किए जा रहे हैं।

जनवरी में ही 30 से अधिक केस कोर्ट के आदेश पर दर्ज किए गए हैं। पूरे साल की बात करें तो 365 से ज्यादा मामले हो जाते हैं। हत्या तक के मामले भी कोर्ट के पास पहुंचे हैं जिनमें एफआईआर दर्ज नहीं की गई। 
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कोर्ट ने आदेश दिया तब न केवल केस दर्ज हुआ बल्कि विवेचना भी की गई। जेल में बंद बिल्डर शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ कई मामले ऐसे हैं जिन्हें पुलिस ने दर्ज नहीं किया तो पीड़ित कोर्ट पहुंचे। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस लिखा।
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कोर्ट ने दिया आदेश

दो दिन पहले ही सीजेएम कविता मिश्रा ने थाना सैंया के हत्या के मामले में आरोपी बृजेश व कपिल निवासी नगला धनी, सादाबाद (हाथरस), राघवेंद्र सिंह उर्फ रमाकांत सिंह निवासी भदरौली, पिनाहट और दो लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के आदेश किए हैं। गांव कुल्हाड़ा, थाना खेरागढ़ निवासी अनार सिंह ने कोर्ट में प्रार्थनपत्र दिया।

रिपोर्ट दर्ज न किए जाने की शिकायतों दो तरह के मामलों में ज्यादा हैं। एक तो बिल्डरों के खिलाफ आने वाले धोखाधड़ी के मामले। दूसरा पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें। हाल ही में कोर्ट के आदेश पर इस तरह के 20 से अधिक केस दर्ज किए गए हैं।

जिला शासकीय अधिवक्ता बसंत कुमार गुप्ता ने बताया कि कोर्ट ने आदेश दिया है तो पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी ही होगी। अगर कोर्ट का आदेश नहीं माना जाता है तो यह कंटप्ट आफ कोर्ट ( न्यायालय की अवमानना ) की श्रेणी में आता है।  
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