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ताजमहल में भीड़ कंट्रोल करने के बजाय ASI ने पर्यटकों दिया झटका, इनकी भी न सुनी

Tue, 13 Feb 2018 04:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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ताजमहल
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महज 14 महीने में ताजमहल का टिकट 7 गुना करने जा रहे संस्कृति मंत्रालय ने इस बार भी पर्यटन उद्यमियों की आपत्तियों को सिरे से खारिज कर दिया है। 22 दिसंबर को ताज समेत स्मारकों का टिकट बढ़ाने की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। 
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इसमें 30 रुपये की जगह भारतीय पर्यटकों को 40 का टिकट और विदेशियों को 500 की जगह 600 रुपये का टिकट बढ़ाने की बात थी, लेकिन अब संस्कृति मंत्री ने गजट के उलट ताज का टिकट 50 और मुख्य गुंबद में कब्रें देखने के लिए 200 रुपये प्रस्तावित किए हैं। 

ताजमहल में क्रिसमस के सात दिन और होली, दिवाली, दशहरा समेत केवल 14 से 15 दिन ही ऐसे हैं, जब भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन इसका सहारा लेकर संस्कृति मंत्रालय और एएसआई ने ताज का टिकट बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
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एएसआई ने गजट तो 40 रुपये का किया, लेकिन आपत्तियों के बाद कम करने की जगह 50 रुपये का प्रवेश टिकट करने का फैसला ले लिया। स्टेप टिकटिंग यानी मुख्य गुंबद में कब्र देखने के लिए अलग से 200 रुपये का टिकट लगाने का प्रस्ताव प्रारंभिक अधिसूचना में है ही नहीं। 

ताजमहल पर भीड़ नियंत्रण के लिए संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा टिकट की दर बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, जबकि टिकट दर बढ़ाने से भीड़ में कमी तो नहीं आई, भीड़ बढ़ और गई।
 
संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने सर्किट हाउस में ताजमहल से जुड़े जिन मुद्दों पर चर्चा की, उसमें एक भी पर्यटन उद्यमी से न तो सुझाव लिए गए और न ही आपत्तियां। सोमवार रात को हुई बैठक में गैर सरकारी सदस्यों में तीन लोग मौजूद थे, जिनका पर्यटन से वास्ता नहीं था। 

ताज का टिकट महंगा करने के प्रस्ताव पर जिन पर्यटन संगठनों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं, उनमें से किसी को भी बैठक में नहीं बुलाया गया। ताज के तीनों प्रस्तावों पर इन्हीं तीन लोगों से बात करके निर्णय ले लिया गया।

आपसी फूट से कमजोर हैं पर्यटन उद्यमी

शहर में 20 साल से पर्यटन उद्यमी एक ही ज्ञापन को लेकर पर्यटन मंत्रियों और अफसरों के पीछे घूम रहे हैं। हर बार केवल नाम और तारीख बदलकर उसी 20 सूत्री ज्ञापन को सौंप देते हैं, लेकिन एक भी काम पर्यटन हित में नहीं करा सके। 

एक-दो नहीं बल्कि कई गुटों में बंटे पर्यटन उद्यमी हर बार ताज का टिकट महंगा होने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का एलान करते हैं, लेकिन 1999 को छोड़कर अब तक नहीं जा सके। दो दर्जन पर्यटन संस्थाओं के नाम पर पर्यटन हितों की बातें तो करते रहे हैं, लेकिन अपनी आवाज तक नहीं उठा सके।

टूरिज्म गिल्ड के सचिव राजीव सक्सेना का कहना है कि संस्कृति मंत्री जी, पर्यटन उद्योग खराब दौर से गुजर रहा है, कृपया टिकट दर बढ़ाकर पर्यटन उद्योग को झटका न दें। स्टेप टिकटिंग के अलावा भीड़ नियंत्रण के अन्य उपाय हैं, पहले उन्हें अपनाएं, सैलानियों को ताज से दूर न करें।
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खजाना भरने की तैयारी

होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान का कहना है कि भीड़ की समस्या महज 15 दिन की है, लेकिन एएसआई पूरे 365 दिन टिकटों के दाम बढ़ाकर खजाना भरेगा। भीड़ नियंत्रण के लिए पहले रेलिंग हटवाई जाए, अन्य भीड़ प्रबंधन के उपाय किए जाएं। 

टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के शमशुद्दीन ने कहा कि ये किसने कहा कि स्टेप टिकट पर 200 रुपये लगाने से पर्यटकों की भीड़ कम हो जाएगी। एएसआई भीड़ नियंत्रण की जगह केवल कमाई करने में जुटा है। ताज पर सैलानी परेशान होते रहेंगे और टिकट महंगा होता रहेगा। 

ये जताई जा चुकी हैं आपत्तियां
- पर्यटकों को दूध देने वाली गाय न समझें, टिकट बढ़ोतरी वापस लें
- भीड़ नियंत्रण की नाकामी का ठीकरा टिकट बढ़ाकर पर्यटक पर न फोड़ें
- देश में सबसे महंगा प्रवेश टिकट ताजमहल का है, जिसे कम किया जाए
- स्कूली बच्चे, ग्रेजुएट और रिसर्च स्कॉलर के लिए महंगा है ताज का दीदार
- दर बढ़ाने की जगह पर्यटन सुविधाएं बढ़ाएं, टॉयलेट, पार्किंग सुविधा दी जाए
- गोल्फ कार्ट, बैटरी बसें, टर्न स्टाइल गेट लगाकर सुविधाएं देने की जरूरत
- आईटो (इंडियन एसोसिएशन आफ टूर आपरेटर्स), गिल्ड, ट्रेवल एजेंट, गाइड, होटल एसो. से बैठक के बाद ही प्रस्ताव लाएं
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