‘दुग्ध उत्पाद की खरीद का पैसा दिया था, उसे ही वह उधार बता रहा है’
इस संबंध में राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि शांति स्वीट्स से पहले उनकी फर्म शांति डेयरी थी। 1997-98 में इसकी स्थापना के समय से भीकम सिंह कर्मचारी थे। आठ-दस साल बाद अशोक अग्रवाल को भी कर्मचारी के रूप में रखा था। भीकम सिंह को पूरा प्रकरण मालूम है। उसने जवाब भी दिया है।
भीकम सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि कमला नगर निवासी अशोक अग्रवाल शांति डेयरी मिल्क प्लांट पर काम करता था। इसी बीच उसने लंगड़े की चौकी के पास किराए की दुकान खोली। शांति डेयरी से उधार में दूध, दही, मक्खन लेकर बेचने लगा। बकौल भीकम, वह भी अशोक अग्रवाल की दुकान पर नौकरी करने लगा।
अशोक शांति डेयरी से माल उधार में लाकर 15-20 दिन बाद पैसा जमा होने पर शांति डेयरी मिल्क व शांति स्वीट्स के बैंक खाते में जमा कराया करते थे। अब अशोक अग्रवाल ने राज्यमंत्री उदयभान सिंह, उनके बेटे राजीव व पुत्रवधू रश्मि के खिलाफ जो शिकायत की है, वह पूर्णत: गलत है। अशोक ने जो पैसा शांति डेयरी व शांति मिल्क के खातों में जमा करवाया है, वह दूध व दूध से निर्मित उत्पाद की उधारी के भुगतान के रूप में दिया गया है।