हिंदुस्तान के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान की शनिवार को 22वें वजीर-ए-आजम के रूप में ताजपोशी हुई। पड़ोसी मुल्क की इस घटना के आगरा शहर के लोग भी गवाह बने। इसका कारण बने पड़ोसी मुल्क के सदर ममनून हुसैन, जिनका आगरा से गहरा रिश्ता है। 1940 में नाई की मंडी स्थित हथाई में ममनून हुसैन का जन्म हुआ। पाकिस्तान के राष्ट्रपति विभाजन के समय अपने परिजनों के साथ चले गए थे। अखंड हिंदुस्तान के जमाने में ममनून ने आगरा के मंटोला की गलियों में अपने दोस्तों के साथ जमकर मस्ती की।
आजादी के दौर में हिंदुस्तान का विभाजन हुआ तो ममनून के दादा उस्ताद जफर अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चले गए। पेशे से जूते का कारोबार करने वाले ममनून के परिवार ने पाकिस्तान में भी इसी काम को आगे बढ़ाया और पड़ोसी मुल्क में प्रमुख जूता कारोबारी बन गए। उद्योग से राजनीति की गलियों में होते हुए ममनून 2013 में पड़ोसी मुल्क के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे। उस समय में भी आगरा में स्थित उनके पुश्तैनी आवास, जहां वर्तमान में उनके रिश्तेदार नईम और उनका परिवार रहता है, ने जमकर जश्न मनाया था।
वहीं अब शनिवार को पाकिस्तान में इमरान के वजीर-ए-आजम बनने के लिए आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में ममनून ने ही उन्हें पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई। आगरा में ममनून के रिश्तेदार भी टीवी और इंटरनेट के माध्यम से इस ऐतिहासिक पलों के गवाह बने। ममनून हुसैन के रिश्तेदार कहते हैं कि यह हमारे के लिए खुशी की बात है। उसी मकान में रह रहे मोहम्मद नईम ने बताया कि ममनून हुसैन के दादा उस्ताफ जफर हमारे वालिद हाजी निजामुद्दीन के फूफा लगते थे। इसी मकान में रहने वाली हज्जन हुसनआरा ने कहा कि बंटवारे से पहले हिंदुस्तान-पाकिस्तान एक थे। बंटवारे के बाद ममनून के दादा अपने परिवार को लेकर चले गए लेकिन उनका राष्ट्रपति बनना और शनिवार को पाक प्रधानमंत्री को शपथ दिलाने हमारे के लिए फख्र की बात है।
कांग्रेस के कार्यवाहक शहर अध्यक्ष हाजी जमीलउद्दीन कुरैशी ने कहा कि वे हमारे रिश्तेदार लगते हैं। आज भी मेरा छोटा भाई पाकिस्तान में रहता है और उनसे लगातार मुलाकात होती है। भाई का फोन आता है कि ममनून हुसैन ने याद किया है लेकिन मैं जा नहीं पाता। उन्होंने इमरान खान को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई है यह मंटोला क्या पूरे आगरा के लिए फख्र की बात है।