यमुना नदी में गिर रहे नालों के जरिये पहुंच रहे प्लास्टिक कचरे को रोकने के लिए नगर निगम ने नई पहल की है। सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा नदी में डाल रहे मंटोला और ताजमहल पूर्वी गेट नाले पर ट्रैश स्किमर ऑटोमैटिक मशीन लगाई गई है, जिसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
यह मशीन प्लास्टिक कचरे को यमुना नदी में पहुंचने से पहले ही नाले पर फ्लोटिंग बैरियर लगाकर रोकेगी और ऑटोमैटिक मशीन इस कचरे को उठाकर नाले के किनारे रख देगी। यहां से नगर निगम इस प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल केंद्र या मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर भेजेगा।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि सबसे पहले मंटोला नाले पर ट्रैश स्किमर को लगाया जा रहा है, जो यमुना नदी में ठोस कचरा और प्लास्टिक को पहुंचने से रोकेगा। यमुना नदी में मिलने से पहले मंटोला नाले के मुहाने पर कचरे को रोकने के लिए फ्लोटिंग बैरियर लगाया गया है। इससे नाले के प्रवाह में ही कचरे को ट्रैप कर वहीं से बाहर निकाल लिया जाता है।
इससे पानी का बहाव नहीं रुकता, लेकिन ऊपर तैर रहा कचरा एक ओर पहुंच जाता है, जिसे ट्रैश स्किमर उठाकर नाले के बाहर फेंक देता है। छंटे हुए कचरे को कन्वेयर या कर्मचारी की मदद से हटाकर रीसाइकिल सेंटर भेज दिया जाएगा। मंटोला नाले के बाद इसे ताजमहल के पास पूर्वी गेट नाले पर लगाया जाएगा। इन दोनों नालों में लगने के बाद ताजमहल के पीछे यमुना नदी में प्लास्टिक कचरे पर रोक नजर आएगी।
चार साल पहले लगाया बबल कर्टेन हो चुका फेल
मंटोला नाले पर जहां ट्रैश स्किमर लगाया गया है, उसी जगह पर सोलर पावर से चलने वाला बबल कर्टेन लगाया गया था। प्लास्टिक कचरे को यमुना में पहुंचने से रोकने के लिए इसे वर्ष 2022 में लगवाया गया था, जिसमें लाखों टन प्लास्टिक कचरा निकालने का दावा किया गया था। हालांकि ये दावे केवल आंकड़े भर रहे। ट्रायल में ही यह तकनीक फेल हो गई।