50 साल बाद महाशिवरात्रि पर महायोग बन रहा है। 13 और 14 फरवरी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि पर सूर्य और बुध के योग से बुधादित्य एवं मंगल और शुक्र के दृष्टि संबंध से स्नेह योग के अलावा सिद्ध योग भी रहेगा। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि इससे पहले 27 फरवरी 1968 को यह योग बना था।
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पाराशर के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन निशिदकाल में शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 13 फरवरी को रात 10.04 बजे से चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। यह अगले दिन 14 फरवरी को रात 12.47 तक रहेगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. हरिकृष्ण पाराशर ने बताया कि निर्णय सागर पंचांग के अनुसार 13 फरवरी को चौदस रात 10 बजकर 34 मिनट पर लगेगी, जो 14 फरवरी को रात 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगी।
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अत: 13 फरवरी को प्रदोष व्रत रहेगा और ज्योतिर्लिंग पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक 14 फरवरी को ही मान्य रहेगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। मकर का चंद्रमा रहेगा। बुधवार की महाशिवरात्रि है, जो सभी के लिए शुभ होगी।
आचार्य डॉ. हरिगोपाल शर्मा (भागवत किंकर) के मुताबिक महाशिवरात्रि अभिषेक के साथ-साथ पूजन और जागरण का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और पार्वती की पूजा करें।
रोली, चावल, मौली, पान, सुपारी, लौंग, इलाइची, चंदन, दूध, दही, घी, शहद, बूरा, फल, कमल गट्टा, धतूरा, बेलपत्र आदि भगवान शिव को अर्पित करें। धूप, दीप जलाकर रात को जागरण करें और चार बार आरती करें।
देवादि देव महादेव के महाशिवरात्रि पर्व के लिए तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। शिवालयों में विशेष आयोजन होंगे। शहर के प्राचीन बल्केश्वर नाथ महादेव मंदिर की तैयारियों के विषय में महंत सुनील कांत नागर ने बताया कि महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर और मां पार्वती का विवाह हुआ था।
इसलिए मंदिर में 12 फरवरी से मेहंदी के आयोजन के साथ कार्यक्रमों का आगाज होगा। 13 फरवरी (मंगलवार) को शिव बारात का आयोजन होटल पार्क लेन कमला नगर से होगा।
रात में नौ बजे, 12, 03 और सुबह छह बजे महाआरती का आयोजन होगा। दिनभर पूजन कार्यक्रम होंगे। 14 फरवरी को भी विशेष पूजा होगी। प्राचीन मन:कामेश्वर महादेव मंदिर, राजेश्वर महादेव, रावली महादेव, पृथ्वीनाथ और कैलाश महादेव मंदिर में भी विशेष आयोजन होंगे।