आगरा के मैक्स डायग्नोस्टिक एवं पैथेलॉजी में सिर्फ लिंग भ्रूण परीक्षण की झूठी रिपोर्ट नहीं दी जा रही थी बल्कि गर्भपात भी किया जा रहा था। 20 हजार रुपये गर्भस्थ शिशु का लिंग बताने के लिए लेते थे।
हर केस में बेटी ही बताई जाती थी क्योंकि परीक्षण तो होता ही नहीं था। पहले से तय कर रखा था कि कोई भी आए, बेटी ही बतानी है। ये डाक्टर लोगों का मनोविज्ञान भी अच्छी तरह समझते थे। उन्हें मालूम था कि यहां वे लोग आते हैं, जो बेटियों का जन्म नहीं चाहते हैं।
इसी कमजोर नस को दबा रहे थे। फीटस डाप्लर से बताते कि गर्भ में बेटी है। पीसीपीएनडीटी दल ने पहले ही मालूम कर लिया था कि यहां क्या खेल चल रहा है।
सूत्रों की मानें तो एक गर्भवती महिला पहले टेस्ट कराकर जा चुकी थी। उसने अधिकारियों को रिपोर्ट दी थी। इसके बाद ही दूसरी महिला को भेजा गया। यहां भरतपुर से काफी महिलाएं आ रही थी।
यूं बताते थे रिपोर्ट
पीसीपीएनडीटी दल के सदस्यों ने तीन दिन पहले जाल बिछाया था। सेंटर के बारे में पड़ताल कराई गई। यह भी पता चल गया था कि यहां टेस्ट कराने आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं का रिकार्ड रजिस्टर में नहीं रखा जाता है। जिनसे एजेंट के माध्यम से लिंग भ्रूण परीक्षण की बात होती थी, उनका नाम पता दर्ज नहीं किया जाता था। रिपोर्ट भी कान में बताई जाती थी।
दल ने पूरा किया शतक
शहर में ऐसे और भी सेंटर चल रहे हैं। पिछले दिनों पकड़े गए दलालों ने इसकी जानकारी दी थी। यमुना पार में चार सेंटर बताए थे। दो तो बेसमेंट में चल रहे हैं। जल्द ही इन पर छापामारी हो सकती है।
राजस्थान में पीसीपीएनडीटी दल गठित होने के बाद यह 100वीं कार्रवाई थी। यूपी में दस, गुजरात में सात, दिल्ली मे एक, हरियाणा और पंजाब में तीन तीन मामले पकड़े गए हैं।