बटेश्वर। तीर्थ बटेश्वर में ग्राम हरलालपुरा क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए भव्य 64 योगिनी चंडी महायज्ञ एवं श्रीमद् देवी भागवत कथा का शुभारंभ शुक्रवार को हो गया। इस अनुष्ठान की शुरुआत शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुई। 101 कन्याओं ने मोक्षदायिनी यमुना मैया की विशेष पूजा-अर्चना कर कलशों में जल भरा, जिसके बाद बैंड-बाजों और जयकारों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। बटेश्वर से शुरू हुई यह यात्रा विभिन्न मार्गों से होती हुई कथा स्थल पहुंचकर संपन्न हुई।
कलश यात्रा के समापन के बाद कथा व्यास लवकुश पाठक के मुखारविंद से श्रीमद् देवी भागवत कथा का विधि-विधान से शुभारंभ हुआ। कथा व्यास ने देवी महात्म्य का वर्णन करते हुए धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित यह महायज्ञ और कथा 28 जून तक चलेगी। प्रतिदिन सुबह 64 योगिनी महायज्ञ का आयोजन होगा। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक श्रद्धालु देवी भागवत कथा का श्रवण कर सकेंगे।
खेरागढ़ में कलश यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत
खेरागढ़। कस्बा स्थित वनखंडी आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के शुभारंभ से पूर्व शुक्रवार को निकली भव्य कलश यात्रा ने पूरे नगर को भक्तिमय रंग में रंग दिया। सिर पर कलश धारण किए महिलाओं के मंगल गीत, भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे और श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ ने वातावरण को पूरी तरह धर्ममय बना दिया। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कथा व्यास महेश चंद्र शास्त्री के सानिध्य में निकली कलश यात्रा का स्वागत किया गया। नगर पंचायत चेयरमैन सुधीर गर्ग ‘गुड्डू’ ने अपने आवास पर श्रद्धालुओं का शर्बत पिलाकर स्वागत किया। आयोजन समिति के अनुसार वनखंडी आश्रम में 19 से 25 जून तक श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होगा। कलश यात्रा में मनोज तोमर, लाला अस्थाना, नीरज पराशर, प्रमोद मित्तल, ब्रजेश सभासद, विज्जो तोमर, आरके बंसल, सतेंद्र अस्थाना, भगवान दास कुशवाह शामिल रहे।
राम से जुड़ा समय ही शुभ : आशुतोष बापू
बाह। जैतपुर के धर्मसिंह पुरा गांव में गाजे बाजे के साथ निकली कलश यात्रा के बाद व्यासपीठ पर विराजमान हुए आशुतोष बापू ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि ‘व्यवहार संहिता’ और ‘भवपार संहिता’ है। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा देता है और भवसागर पार कराने में सक्षम है। गोस्वामी तुलसीदास ने 452 वर्ष पहले श्रीरामचरितमानस की रचना की थी, लेकिन कथा का स्वरूप इससे कहीं प्राचीन है। उन्होंने कहा कि राम से जुड़ा समय ही जीवन का वास्तविक शुभ समय है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व में 100 करोड़ से अधिक रामायणें लिखी गई हैं, क्योंकि भगवान राम के जीवन प्रसंगों को अलग-अलग लोगों ने अपने अनुभव और दृष्टि से वर्णित किया है। इससे पहले गाजे बाजे के साथ निकली कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की गई। इस दौरान परीक्षत कमला देवी, यज्ञपति आनंद सिंह भदौरिया, कुशमा देवी, श्याम सिंह, श्यामबहादुर सिंह भदौरिया आदि ने व्यवस्थाएं संभाली।