चारों मीनारों और दीवारों के मडपैक के बाद ताजमहल पर फिर से काले दाग लगने लगे हैं। दिवाली से पहले पांच दिन और बाद के दिनों में वायु प्रदूषण के कारण ताजमहल की सतह पर फिर से कार्बन और धूल के कण जमा होने लगे हैं, जिससे ताज की रंगत में फिर से बदलाव नजर आने लगा है। नगर निगम द्वारा कचरा जलाए जाने से जहरीली हुई हवा के कारण ही देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में आगरा दस दिनों से चौथे स्थान पर रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स में दिल्ली एनसीआर के शहरों के बाद देश के सबसे प्रदूषित चौथे शहर के रूप में आगरा दिवाली पर देश भर में छाया रहा। एयर क्वालिटी इंडेक्स में बेहद खतरनाक स्तर यानी सीवियर कैटेगरी में पहुंचे शहर की बेमिसाल इमारत ताजमहल को इससे खासा नुकसान हो रहा है। एएसआई केमिकल ब्रांच ने प्रदूषणकारी तत्वों के सैंपल लेकर तो जांच को भेज दिए हैं, लेकिन पीलापन हटाने के लिए शुरू किए गए मडपैक के बाद भी ताज की दीवारों पर धूल और कार्बन के कण जमा होकर फिर से पीलापन बढ़ा रहे हैं। हाल ये है कि शुक्रवार को भी आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स वेरी पूअर के करीब यानी 291 पर रहा। आम लोगों के स्वास्थ्य पर इस इंडेक्स के दौरान सांस लेने में दिक्कतें आने लगती हैं। दिवाली पर तो एक्यूआई 450 से ज्यादा तक रहा है।
यही रहा हाल तो हर साल लगाना होगा मडपैक
पीएम-2.5 के खतरनाक स्तर तक पहुंचने और प्रदूषणकारी तत्वों के मानकों से दस गुना तक पहुंचने के कारण ताजमहल पर मडपैक भी कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। एएसआई विशेषज्ञों के मुताबिक दिवाली पर जिस तरह से वायु प्रदूषण ने सभी रिकार्ड तोड़े हैं, उससे तो ताजमहल के संगमरमर को नुकसान होना तय है। धूल और कार्बन कणों की भारी मौजूदगी के कारण हर साल ही मडपैक लगाना होगा। एएसआई रसायन शाखा ने हाल में ही चारों मीनारों और यमुना किनारे की दीवार पर मडपैक किया है, लेकिन दिवाली पर दस दिनों तक प्रदूषण बढ़ने से मडपैक भी बेअसर दिखने लगा है।