नर हाथी सूरज और राजेश ने वाइल्डलाइफ एसओएस के साथ मनाई आज़ादी की वर्षगाँठ
आगरा। विशालकाय शरीर, बड़े-बड़े कान और लंबी सूंड वाला हाथी यूं तो जंगली जीव है, लेकिन सूरज और राजेश सालों-साल इंसानी क्रूरता का शिकार बने रहे। वाइल्ड लाइफ एसओएस ने सूरज को 40 साल की उम्र में महाराष्ट्र के एक मंदिर से मुक्त कराया तो राजेश को उत्तर प्रदेश के सर्कस से। चुरमुरा स्थित हाथी संरक्षण केंद्र में बुधवार को दोनों हाथियों ने अपनी आजादी के 15 और 10 साल का जश्न मनाया।
वाइल्ड लाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण बताते हैं कि अब सूरज की आयु 55 साल है। जब वो केंद्र में आया था तो उसके पैर गंभीर रूप से सड़ चुके थे। बायां कान भी अस्थाई रूप से क्षतिग्रस्त था। लंबे इलाज और देखभाल के बाद सूरज ने अपना आत्मविश्वास वापस पाया है। केंद्र की सह संस्थापक गीता शेषमणि बताती हैं कि राजेश को अप्राकृतिक करतब दिखाने के लिए अमानवीय पीड़ा दी जाती थीं, लेकिन केंद्र के सहयोगियों की विशेष देखभाल से दोनों हाथियों को केंद्र के प्रिय हाथियों में तब्दील कर दिया है। केंद्र के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी बताते हैं कि सालों उत्पीड़न झेल रहे हाथियों को रातों-रात ठीक नहीं किया जा सकता। इन्हें विशेष देखभाल, उपचार और खुराक के साथ प्रेम दिया जाता है, तब सालों में यह अपनी पुरानी दुखद स्मृतियों को भूल पाते हैं।