आगरा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में लगी आग और जांच के नाम पर सील किए गए कक्ष को खोलने की कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी को पत्र लिख कक्ष खुलवाने की मांग की गई है जिससे शिक्षकों को उनके प्रमाणपत्र सौंपे जा सकें।
प्रकरण साढ़े चार साल पुराना है। दशहरे की शाम बीएसए कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में आग लग गई। जिसमें तमाम शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्र जल गए थे। आरोप लगा तत्कालीन सहायक पटल पर क्योंकि तब एसटीएफ द्वारा फर्जी बीएड प्रमाणपत्रों के जरिए बेसिक शिक्षा विभाग में नियुक्ति पाने वाले अध्यापकों की जांच की जा रही थी।
इसमें साल 2004-05 में बीएड करने वालों के साथ साल 2008 और 2010 से 19 के बीच नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों की जांच हो रही थी। प्रकरण में पूरे प्रदेश में कई शिक्षक निलंबित भी हुए वहीं सैकड़ों के नपने की आशंका थी। आगरा में भी फर्जी अंक तालिकाओं से नौकरी पाने वाले तमाम शिक्षक एसटीएफ के निशाने पर थे। जिस रिकॉर्ड रूम में आग लगी वहां आरोपी शिक्षकों के भी रिकॉर्ड थे।
आग के बाद जिलाधिकारी और तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने कमरे को सील कर दिया था। तब से सही शिक्षकों के रिकॉर्ड यहां सील हैं। अमर उजाला में समाचार छपने के बाद यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी बीएसए को ज्ञापन दे कक्ष की सील खुलवाने की मांग की थी।
दो दिन पूर्व प्रकरण में पत्रावलियां खंगालने क्राइम ब्रांच के अधिकारी भी बीएसए कार्यालय पहुंचे थे। जिसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से पत्र लिख कक्ष की सील खुलवाने का आग्रह किया है। इस संबंध में बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि उनके द्वारा पुलिस आयुक्त को पत्र लिख कक्ष खुलवाने का आग्रह किया गया है।