बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से आगरा कॉलेज को नए सत्र के लिए विधि पाठ्यक्रम संचालित करने की मान्यता अब तक नहीं मिल सकी है। हालांकि प्रस्ताव भेजा गया है। इससे यहां बीएएलएलबी और एलएलबी के प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं। छात्रों को दूसरे निजी कॉलेजों का रुख करना पड़ रहा है।
आगरा कॉलेज के विधि संकाय में बीएएलएलबी और एलएलबी की 300-300 सीटें हैं। कॉलेज के पास बीसीआई की स्थायी मान्यता नहीं है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन को हर सत्र के लिए मान्यता का आवेदन करना पड़ता है।
वर्ष 2025-26 सत्र के लिए अब तक मान्यता न मिलने से प्रवेश रुका हुआ है। जबकि अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश हो रहे हैं। बीसीआई के आवेदन में कॉलेज को शिक्षकों की संख्या, प्रयोगशाला, कक्षों की संख्या समेत कई विवरण देने होते हैं। फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी भी भेजी जाती है। इसके बाद मान्यता मिलती है।
मान्यता मिलने के बाद डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के समर्थ पोर्टल पर पंजीकरण कराते ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्राचार्य प्रो. चित्र कुमार गौतम ने बताया कि मान्यता के लिए प्रस्ताव भेज दिया है। तीन लाख रुपये शुल्क भी जमा कर दिया है। अगले सप्ताह तक अनुमति मिलने की उम्मीद है। साथ ही इस बार 4 साल के लिए मान्यता देने के लिए भी पत्र भेजा है।
छात्रों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष गौरव शर्मा ने बताया कि आगरा कॉलेज में शैक्षणिक शुल्क कम है। प्रवेश प्रक्रिया पिछड़ने से छात्र निजी कॉलेजों में प्रवेश ले रहे हैं। इससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कॉलेज प्राचार्य को स्थायी मान्यता के लिए प्रयास करना चाहिए।