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विद्युत शवदाह गृह पर एडीए का कब्जा

Wed, 16 Dec 2015 02:12 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला ब्यूरो
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पर्यावरण के खातिर अंतिम संस्कार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत शवदाह गृह में दाह संस्कार पर जोर दिया है। मगर, इस निर्देश का पालन आखिर कैसे होगा। यहां व्यवस्थाएं ऐसी नहीं हैं कि ताजगंज मोक्षधाम पर होने वाले दाहों का बोझ यह अकेला विद्युत शवदाह गृह उठा सके। एक तरफ भट्ठियों की कमी आड़े आएगी तो दूसरी तरफ पार्किंग की समस्या खड़ी होगी। क्योंकि यहां सिर्फ दो ही भट्ठियां हैं और शवदाह गृह का अधिकांश हिस्सा आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के कब्जे में है। एडीए यहां बैटरी बसों का डिपो संचालित कर रहा है।
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ताजगंज श्मशान घाट पर शवों के अंतिम संस्कार से ताजमहल पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को अपनी मंशा साफ कर दी। ताजगंज श्मशान घाट को फिलहाल न हटाने और अंतिम संस्कार की पुरानी परंपरा अपनाने के  बजाए विद्युत शवदाह गृह में दाह पर जोर दिया। एक जनवरी से यहां मुफ्त में सेवा देने के निर्देश भी दिए हैं। मगर, इस निर्देश पर अमल में सबसे बड़ा रोड़ा एडीए बनेगा। शासन के निर्देश पर अवंतीबाई चौराहा के पास विद्युत शवदाह गृह का निर्माण कराया गया। वर्ष 1995 इसका संचालन क्षेत्र बजाजा कमेटी के हाथों में सौंप दिया गया। मगर, जागरूकता के अभाव में यहां इक्का-दुक्का ही अंतिम संस्कार होते थे। इसी को देखते हुए एडीए ने इसके एक हिस्से पर ताजमहल के आस-पास चलने वाली बैटरी बसों का डिपो बना दिया। बैटरी बसों का बेड़ा जैसे-जैसे बढ़ता गया, वैसे-वैसे एडीए शवदाह गृह को घेरता गया। वर्तमान में इस शवदाह गृह ने बैटरी बसों के डिपो का रूप ले लिया है। प्रवेश द्वार से ही बसों का जमघट लगा रहता है। अब जब कुछ लोग यहां अपनों के अंतिम संस्कार के लिए कदम आगे बढ़ा रहे हैं तो यही डिपो रोड़ा बन रहा है। पार्किंग के लिए जगह ही नहीं बची है। विद्युत शवदाह गृह को एडीए के कब्जे से मुक्त कराने के लिए क्षेत्र बजाजा कमेटी पिछले दो दशक से प्रयास कर रही है। कमेटी के पदाधिकारी प्रशासन से लेकर शासन तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं से भी उम्मीद की किरण नहीं दिखाई दी है।

भट्ठियां भी कम पड़ जाएंगी
विद्युत शवदाह गृह पर शुरुआत से ही दो ही भट्ठियां हैं। यहां एक शव के दाह में लगभग दो घंटे का समय लगता है। एक अनुमान के मुताबिक, ताजगंज मोक्षधाम पर प्रतिदिन 30 से अधिक अंतिम संस्कार होते हैं। लगभग 15 अंतिम संस्कार तो क्षेत्र बजाजा कमेटी द्वारा संचालित व्यवस्थाओं के माध्यम से ही होते हैं, बाकी अधिकांश लोग दाह के लिए लकड़ी आदि सामान अपने साथ लेकर आते हैं। विद्युत शवदाह गृह पर इतनी संख्या में शवों का दाह 24 घंटे में भी मुश्किल होगा। ताजगंज मोक्षधाम पर सर्दियों में अंतिम संस्कार ज्यादा होते हैं।
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अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था
. सभी वैदिक व धार्मिक रीतियों का पालन
. संस्कार क्रिया के दौरान पांच लकड़ी, घी, धूप, चंदन आदि रखने की व्यवस्था
. कपाल क्रिया व अस्थिफूल एकत्रित करने की व्यवस्था
. गंगाजल भी उपलब्ध रहता है

विद्युत शवदाह गृह को एडीए के कब्जे से मुक्त कराने के लिए हमारी संस्था कई सालों से प्रयास कर रही है, लेकिन अधिकारियों के कान पर अब तक जूं नहीं रेंगी है। यदि शवदाह गृह का यह हिस्सा खाली हो जाए तो लोगों को जागरूक करने के लिए यहां सामाजिक और धार्मिक आयोजन किए जा सकते हैं। पार्किंग के लिए जगह उपलब्ध होगी।
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- सुनील विकल, अध्यक्ष, क्षेत्र बजाजा कमेटी
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