आगरा विकास प्राधिकरण ने जवाहर पुरम योजना में आठ करोड़ रुपये की कीमत की 3800 वर्ग मीटर भूमि बृहस्पतिवार को 32 साल बाद कब्जा मुक्त कराई। पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में अवैध निर्माण बुलडोजर से ढहा दिए। एडीए की खाली पड़ी भूमि पर कब्जा कर अवैध रूप से मकान व दुकानें बना ली गईं थीं।
वर्ष 1988 में एडीए ने जवाहर पुरम योजना विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण किया था। खसरा संख्या 168 व 169 में 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक भूमि थी। जिस पर कागजों में एडीए का कब्जा था। कागजों में कब्जा लेने के बाद विकास प्राधिकरण के अफसर आंख मूंदे रहे। उधर, खाली पड़ी 3800 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध निर्माण, मकान व दुकान बन गई। बाकी भूमि पर एडीए पहले ही व्यावसायिक एवं रिहायशी भूखंड बना कर विक्रय कर चुका था। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ को एडीए की भूमि पर कब्जे की शिकायत मिली। जिसके बाद उन्होंने सचिव को पुलिस व प्रशासन के सहयोग से सरकारी भूमि का कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए।
बुलडोजर से ध्वस्त कर दिए अवैध कब्जे
बृहस्पतिवार को एडीए की भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए अपर नगर मजिस्ट्रेट तृतीय दीपक पाल के नेतृत्व में एडीए अधिशासी अभियंता डीएस भदौरिया, बृजेश कुमार, एई बिजेंद्र कुमार, यूएन पांडेय, डीएस बंसला थाना जगदीशपुरा का पुलिस फोर्स लेकर जवाहर पुरम पहुंचे। भूमि पर हुए अवैध कब्जों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। एडीए की भूमि पर हुए अवैध कब्जे में इंजीनियर व फील्ड कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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दर्ज कराया जाएगा मुकदमा
एडीए उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ का कहना है कि एडीए की भूमि पर कब्जा करने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। भूमि की सर्किल रेट के आधार पर कीमत करीब आठ करोड़ रुपये आंकी गई है।