आगरा के एत्मादपुर मदरा में एडीए ने कन्वेंशन सेंटर के लिए अधिग्रहित जमीन को बेचने के साथ चकमार्ग और आम रास्ते की जमीन भी ई-नीलामी में बेच दी। आरोप है कि इससे आसपास के लोगों का आवागमन बंद हो जाएगा, जबकि मामले की शिकायत के बाद एडीए ने जांच शुरू कर दी है।
आगरा विकास प्राधिकरण ने इनर रिंग रोड के पास 7.4418 हेक्टेयर जमीन का कन्वेंशन सेंटर के नाम पर अधिग्रहण कर लिया। सेंटर अटलपुरम में बनाने पर सहमति बनी तो इस जमीन को बिल्डर को बेच दिया। यही नहीं, इसके साथ चकमार्ग और रास्ते की जमीन का सौदा भी कर दिया। इन रास्तों की एडीए ने ई-नीलामी कर दी। इससे आसपास के प्लॉटधारकों और लोगों का आवागमन बंद हो जाएगा। राजस्व परिषद तक शिकायत पहुंचने के बाद एडीए ने जांच शुरू कर दी है मगर रास्ते को बेचने के इस मामले में रिपोर्ट तक दाखिल नहीं की गई।
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एडीए बोर्ड की 140वीं बैठक में एत्मादपुर मदरा की 7.4418 हेक्टेयर जमीन पर कन्वेंशन सेंटर प्रस्तावित किया गया था। इसमें एडीए द्वारा अर्जित 7.2778 हेक्टेयर भूमि और पुनर्ग्रहण द्वारा प्राप्त 0.1640 हेक्टेयर भूमि शामिल थी। एडीए ने ग्राम समाज की खसरा नंबर 411 की 0.1540 हेक्टेयर भूमि और खसरा नंबर 412 की 0.0100 हेक्टेयर भूमि का पुनर्ग्रहण किया था। एडीए ने यहां अतिरिक्त भूमि नहीं मिलने की स्थिति में कन्वेंशन सेंटर को ग्वालियर रोड पर बनने वाली टाउनशिप अटलपुरम में विकसित करने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद एडीए ने यह खसरा नंबर 411 और 412 की जमीन बेचने का निर्णय लिया। इसके साथ ही इस जमीन के चकमार्ग और रास्ते की जमीन को भी बेच दिया।
यह नियम दरकिनार कर किया सौदा
इसे ई-नीलामी के जरिए बेचा गया, जबकि नियमानुसार कन्वेंशन सेंटर के स्थानांतरित होने के बाद पुर्नग्रहण की भूमि नीलाम नहीं की जा सकती। श्रेणी 6 (2) के तहत इसे न बेच सकते हैं, न भू उपयोग बदला जा सकता है। इसी शासनादेश पर क्षेत्र के लोगों ने आपत्ति लगाकर एडीए में शिकायत की। एडीए के रास्ता और चकमार्ग बेचने से शाहगंज के सत्यप्रकाश शर्मा, संदीप अरोड़ा समेत अन्य लोगों का आम रास्ता भी बंद हो गया। उन्होंने एडीए से शिकायत कर जवाब मांगा तो अफसर आरटीआई में भी जवाब नहीं दे सके।
नाम दर्ज होने से पहले ही बेच दी जमीन
इस पूरे मामले में एडीए के अफसरों पर एक्टिविस्ट डॉ. शरद गुप्ता ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने राजस्व परिषद भेजी शिकायत में सवाल उठाया कि जब 26 जून, 2025 को यह जमीन एडीए के नाम दर्ज की गई तो प्राधिकरण ने 6 जून को ही इसे बेचने की प्रक्रिया कैसे शुरू कर दी। इस रास्ते की जमीन की कीमत सर्किल रेट के हिसाब से 1.66 करोड़ रुपये है। डॉ. शरद गुप्ता ने इस मामले में एडीए अफसरों पर विजिलेंस जांच और रास्ते और चकमार्ग को मूल स्वरूप में दर्ज कराने का निर्णय लेने की मांग की है।
सचिव आगरा विकास प्राधिकरण संजय कुमार ने बताया कि इस प्रकरण में जांच की जा रही है। हर फाइल को देखा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई करेंगे। शिकायतकर्ता संदीप अरोड़ा ने बताया कि एडीए अपनी जमीन बेचे हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन सड़क और चकमार्ग को भी नीलाम कर दिया गया। यहां के लोग कहां से निकलेंगे। यह नियमों का खुला उल्लंघन है। अफसरों की विजिलेंस जांच और कार्रवाई की जाए।