शहर में आवासीय निर्माण करना हो या व्यवसायिक, मानचित्र लेने की जरूरत नहीं है। बस एडीए के अफसरोें का आशीर्वाद लीजिए और निर्माण कर डालिए। किसी ने शिकायत की तो ज्यादा से ज्यादा क्या होगा। एक नोटिस काटा जाएगा और फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी। जी हां! आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की मेहरबानी से शहर में हर दिन अवैध निर्माण हो रहे हैं।
वित्तीय वर्ष 2003-2004 में विधान परिषद को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक आगरा में करीब 3500 अवैध निर्माण हैं, जिनके ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी हो चुके हैं। इनमें शहर की करीब 223 छोटी और बड़ी कालोनियां भी शामिल हैं लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 की अवैध निर्माण की स्थिति देखी जाए तो शहर के 9 वार्डों में करीब 426 अवैध निर्माण हुए हैं। इस हिसाब से प्रतिदिन एक अवैध निर्माण हो रहा है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने 397 के खिलाफ नोटिस की कार्रवाई की है। 26 अवैध निर्माणों को सील किया है और 123 अवैध निर्माण को शमन करके करीब 12.92 करोड़ रुपये कंपाउंडिंग फीस के रूप अर्जित किए हैं लेकिन पूरे वर्ष में एक भी अवैध निर्माण ध्वस्त नहीं किया गया है। जबकि 41 के ध्वस्तीकरण के आदेश हो चुके हैं। 2014-15 में 28 और 2015-16 में प्राधिकरण ने 36 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था। पिछले पांच वर्षों में सत्ता के दबाव में खुलेआम अवैध निर्माण हुए हैं फिर चाहे वह बाईपास पर जोधा द ग्रेट होटल हो या सिकंदरा स्मारक के सामने होटल का निर्माण, ताजमहल के प्रतिबंधित दायरे में भी खुलेआम निर्माण चल रहे हैं।
प्राधिकरण और पुरातत्व विभाग की अलग रिपोर्ट
आगरा शहर में विकास प्राधिकरण के नौ वार्ड में जिनमें हरीपर्वत-1,2,3, ताजगंज, लोहामंडी, छत्ता, शाहगंज, कैंट/रकाबगंज और कोतवाली हैं। प्राधिकरण का एक वार्ड फतेहपुर सीकरी है। विकास प्राधिकरण की वर्ष 2016-17 की अवैध निर्माणों की रिपोर्ट पर नजर डालें तो फतेहपुर सीकरी में अवैध निर्माण नहीं हुआ है। वहीं इसके उलट यदि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से पूछा जाए तो वो कहते हैं कि उन्होंने करीब 370 अवैध निर्माणों के खिलाफ थाने में एफआईआर कराई है।
सीएजी की जांच से प्राधिकरणों में मचा हड़कंप
योगी सरकार ने एक्शन में आते ही सबसे पहले विकास प्राधिकरणों पर निशाना साधा है। 08 अप्रैल को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने विकास प्राधिकरणों की समीक्षा की थी। समीक्षा बैठक के अगले ही दिन योगी ने सीएजी जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसमें गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, लखनऊ, आगरा सहित सभी विकास प्राधिकरणों की जांच कराई जाएगी। जांच के आदेश से आगरा विकास प्राधिकरण में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक 12 अप्रैल (बुधवार) को लखनऊ में आवास एवं शहरी नियोजन राज्यमंत्री की बैठक में भी प्राधिकरण के अधिकारियों अवैध निर्माणों पर मंत्री की नाराजगी का सामना करना पड़ा है।
शहर में हुए अवैध निर्माणों के मामले में सख्ती बरती जा रही है। वार्डों में सर्वे कराया जा रहा है। जिन निर्माणों की सील किया गया है और जिनकी कंपाउंडिंग हुई है उनकी दोबारा जांच कराई जा रही है। प्रवर्तन विभाग से अधिकारियों के तबादले भी किए हैं।
राजकुमार, सचिव आगरा विकास प्राधिकरण