उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने के बाद कछला गंगानदी में बाढ़ की आशंका के मद्देनजर सतर्कता बरकरार है। भले ही फिलहाल नदी में पानी नियंत्रित है लेकिन पानी बढ़ने की संभावना को लेकर बाढ़ रोकथाम के प्रयास जारी हैं। सिंचाई विभाग की टीमों ने बांधों की मरम्मत और कटान रोकने के लिए स्टड (बल्ली पायलिंग) बनाने का काम तेज कर दिया है।
पानी तेजी के साथ हरिद्वार की ओर बढ़ रहा है। हालांकि हरिद्वार तक अधिक पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन जल्द ही हरिद्वार होते हुए पानी कछला गंगानदी में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। डीएम सीपी सिंह जिले में हाई अलर्ट जारी कर चुके हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें गंगा किनारे सटे गांव में मुनादि करा रही हैं। किसी भी हाल में टीमें ढिलाई नहीं बरतेंगी। कहीं पानी बढ़ने पर कटान के हालात न हों ऐसे में सिंचाई विभाग ने अभी से बांधों पर मरम्मत का काम तेज कर दिया है। न्यौली और मेहोला बांध पर सिंचाई विभाग की टीम काम में जुट चुकी हैं। इसके अलावा कछला गंगानदी में जगह-जगह स्टड (बल्ली पायलिंग) बनाए जा रहे हैं। राजस्व, विकास विभाग की टीमें भी नजर बनाए हुए हैं। तटवर्ती गांव के ग्रामीणों से सहयोग मांगा जा रहा है। सिंचाई विभाग का मानना है कि अगले 48 घंटों में कछला गंगानदी में पानी बढ़ सकता है।
तो डूब जाएंगी फसलें, बर्बाद हो जाएंगे किसान
नदी की जमीन पर तराई क्षेत्र के ग्रामीण, तरबूज, खरबूज की पालेज तैयार करते हैं। दिसंबर माह में तरबूज और खरबूज की पालेज की बुवाई हो चुकी है। इनका संरक्षण किसानों द्वारा किया जा रहा है। चूंकि सदैव ही इन दिनों गंगानदी में पानी कम रहता है। ऐसे में धार के समीप ही किसान फसलें बो देते हैं, लेकिन इस बार जैसे ही पानी बढ़ेगा तो निश्चित ही तरबूज, खरबूज की पालेज जलमग्न हो जाएगी। फसलें पानी में डूबने से किसान बर्बाद हो जाएंगे। किसानों को अभी से चिंता सता रही है, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्था किसानों और उद्यान विभाग के पास नहीं है। लगभग 1000 बीघा तरबूज, खरबूज की पालेज इन दिनों नदी की जमीन पर खड़ी है।
फिलहाल यह है पानी की स्थिति
- 5030 क्यूसेक हरिद्वार से छूटा है पानी।
- 7600 क्यूसेक बिजनौर से छूटा है पानी।
- 4205 क्यूसेक नरौरा से छूटा है पानी।
वर्जन-
- अभी अगले 48 घंटों में कछला गंगानदी में पानी बढ़ने की संभावना है। गंगानदी में पानी पहुंचते पहुंचते नियंत्रित हो जाएगा। फिर भी बाढ़ की आशंका के मद्देनजर अलर्टजारी है और बाढ़ निरोधक काम किए जा रहे हैं। - अरूण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई।
- गंगानदी की जमीन पर किसान पालेज कर लेते हैं। रेतीली जमीन में पालेज अच्छी होती है, लेकिन यदि गंगानदी में पानी बढ़ गया तो पालेज जलमग्न हो जाएगी। इस समस्या का कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं है। - योगेश कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।