आगरा के थाना डाैकी पुलिस की हिरासत में आटा चक्की मालिक केदार सिंह (52) की मौत के मामले में 20 घंटे बाद चार पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी। पुलिस आयुक्त ने थाना प्रभारी तरुण धीमान को लाइन हाजिर, कबीस चाैकी प्रभारी सिद्धार्थ चौधरी, एसआई शिवमंगल और एसआई रामसेवक को निलंबित किया गया है। हालांकि परिजन इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की तहरीर दी है।
ग्रामीण अधिकारियों से परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजा, पत्नी के लिए पेंशन और बेटे को नाैकरी की भी मांग की जा रही है। अधिकारियों के आश्वासन पर शाम करीब 4 बजे पोस्टमार्टम शुरू हो सका। इसके बाद शाम 7:40 बजे गांव में अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले पोस्टमार्टम से लेकर गांव गढ़ी हीसिया को पुलिस छावनी बना दिया गया था।गांव गढ़ी हीसिया (डौकी) निवासी केदार सिंह को बृहस्पतिवार दोपहर 2 बजे कबीस चौकी की पुलिस जबरन अपने साथ ले गई थी। पुलिस चाैकी में उनकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि वह किसी केस में आरोपी नहीं थे। इसके बावजूद पुलिस ने चाैकी में ले जाकर पिटाई की।
थर्ड डिग्री से उनकी जान चली गई। उनकी मौत के बाद हंगामा भी हुआ। केदार सिंह की पत्नी ने हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी थी। डीसीपी पूर्वी जोन अतुल शर्मा के आश्वासन पर ग्रामीणों ने जाम खत्म किया था। मगर, शुक्रवार सुबह तक पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई। मामले में भाजपा सांसद राजकुमार चाहर और मंत्री बेबीरानी मौर्य ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। दोपहर 12:30 बजे पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जानकारी दी गई। इसके बावजूद परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी नहीं हुए।
उनका कहना था कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। दोपहर 2 बजे तक परिजन पंचनामा के कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में एसीपी हरीपर्वत आदित्य सिंह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया। मगर, परिजन मानने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने एलान किया कि केस दर्ज होने पर ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। बाद में एसीपी के समझाने पर शाम 4 बजे पंचनामा की कार्रवाई कर पोस्टमार्टम शुरू कराया जा सका। शाम तकरीबन 5.50 बजे शव गांव पहुंचा। इस दाैरान गांव में पुलिस माैजूद रही।