मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में सुधार के लिए अब नए पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं दागी सचिवों से ग्राम पंचायतें हटा ली गई हैं। जिलाधिकारी के अनुमोदन पर डीपीआरओ ने नई तैनाती की सूची जारी कर दी। सूची जारी होने के बाद पंचायत सचिव इसका विरोध भी कर रहे हैं।
पंचायत राज विभाग में हमेशा ही नियमों को ताक पर रखकर काम होता रहा है। जिले में भी पंचायत सचिवों की तैनाती को लेकर कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकारी अपने चहेते पंचायत सचिवों को कई-कई ग्राम पंचायतें आवंटित कर देते हैं, जबकि दूसरे पंचायत सचिव को बमुश्किल एक या दो ग्राम पंचायतें दी जाती हैं। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने समान रूप से ग्राम पंचायतें आवंटित करने के आदेश दिए थे।
जिलाधिकारी के अनुमोदन पर औसतन चार या पांच ग्राम पंचायतें प्रत्येक पंचायत सचिव को दी गई हैं। वहीं दागी सचिवों से ग्राम पंचायतें हटाकर कम कर दी गई हैं। जबकि ये ग्राम पंचायतें नए सचिवों को दी गई हैं। सालों से कब्जा जमाए बैठे पंचायत सचिव इसे गलत भी बता रहे हैं, लेकिन जिलाधिकारी के अनुमोदन के चलते किसी की खुलकर कहने की हिम्मत नहीं है।
मूल निवास का रखा गया ध्यान
ग्राम पंचायतों के आवंटन में इस बात का सख्ती से ध्यान रखा गया कि कहीं किसी सचिव को ऐसी ग्राम पंचायत न मिल जाए, जिसका वह खुद मूल निवासी हो। इतना ही नहीं सचिव को उसके मूल निवास की न्याय पंचायत की भी किसी ग्राम पंचायत का भी कार्यभार नहीं दिया गया है।