डीएनए जांच की अनुमति के दौरान अदालत में की गई टिप्पणी के बाद एसीपी श्वेता वर्मा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू हुई थी। माफी और स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने राहत देते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम सोनिका चौधरी ने सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) श्वेता वर्मा के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई समाप्त कर दी है। एसीपी ने अदालत में बिना शर्त मौखिक और लिखित माफी मांगी थी। अदालत ने उन्हें भविष्य में अनुशासित रहने की चेतावनी दी है।
यह मामला 16 जुलाई, 2026 को शुरू हुआ था। उस दिन एसीपी श्वेता वर्मा जिला कारागार में निरुद्ध एक कैदी के डीएनए जांच रिपोर्ट की अनुमति के लिए अदालत में उपस्थित हुई थीं। उन्होंने अदालत में कहा था कि हमें और भी काम रहते हैं, आपने हमें बुला लिया। इस व्यवहार को अदालत ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 267 के तहत अपराध माना था। 24 जुलाई, 2026 को उन्हें व्यक्तिगत रूप से जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया था। शुक्रवार को एसीपी श्वेता वर्मा अदालत में उपस्थित हुईं और उन्होंने बिना शर्त क्षमा याचना की। उन्होंने एक विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत किया।
अदालत का निर्णय अपने स्पष्टीकरण में एसीपी ने न्यायिक प्रक्रिया, विधि के शासन और अदालत की गरिमा के प्रति गहरी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कभी भी न्यायालय का अनादर करना या न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालना नहीं था। अदालत ने श्वेता वर्मा की 32 वर्षीय आयु और उनकी लंबी सेवा अवधि पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया, यह मानते हुए कि प्रतिकूल आदेश से उनका पूरा कॅरिअर प्रभावित हो सकता था। उनकी ईमानदारी पूर्वक और बिना किसी विवशता के की गई माफी को स्वीकार करते हुए, अदालत ने न्यायिक उदारता दिखाई। इस आदेश को श्वेता वर्मा की सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं माना जाएगा और इसकी प्रति पुलिस आयुक्त को भेजी जाएगी।