एसिड अटैक सर्वाइवर रुकैया को सरकार की ओर से मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपये की राशि दी गई है। उन पर 23 साल पहले तेजाब से हमला हुआ था। इसमें उन्हें अपना चेहरा खोना पड़ा था।
आगरा के शीरोज हैंगआउट कैफे में कार्यरत एसिड अटैक सर्वाइवर रुकैया को नवरात्र पर तोहफा मिला। सरकार की ओर से मुआवजे के रूप में पांच लाख रुपये की राशि दी गई है। उन पर 23 साल पहले तेजाब से हमला हुआ था। इसमें उन्हें अपना चेहरा खोना पड़ा था मगर उन्होंने हार नहीं मानी। हाैसले से जिंदगी की जंग लड़ी। दो साल पहले केस दर्ज कराया। कानूनी मदद से पांच लाख रुपये का मुआवजा हासिल किया। नवरात्र में यह तोहफा मिलने से उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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एत्माद्दाैला क्षेत्र की रहने वाली रुकैया ने बताया कि वर्ष 2002 में वह बड़ी बहन इशरत जहां की ससुराल तुर्कमान गेट, कोतवाली अलीगढ़ गई थीं। वह उस समय 14 वर्ष की थीं। बहन के देवर ने शादी का प्रस्ताव दिया, लेकिन रुकैया ने इन्कार कर दिया। आरोप है कि उसने रुकैया पर तेजाब डाल दिया। उनकी जान तो बच गई, लेकिन चेहरा खराब हो गया। उन्हें काफी पीड़ा का सामना करना पड़ा। 12 सर्जरी के बाद हालत में सुधार हो गया। रुकैया ने हार नहीं मानी। वह चेहरा खराब होने के बावजूद अपने भविष्य की जंग लड़ती रहीं। परिवार की बंदिशों की वजह से तब वो मुकदमा नहीं दर्ज करा सकी थीं। इस कारण सरकारी सहायता भी नहीं मिल पाई।
कुछ वर्ष बाद भाई ने न्याय दिलाने के लिए केस दर्ज कराने का प्रयास किया मगर हर बार पुलिस कई वर्ष पुराना मामला बताकर टालती रही। बाद में वह छांव फाउंडेशन के शीरोज हैंग आउट कैफे में काम करने लगीं। दो वर्ष पूर्व वह तत्कालीन एडीजी जोन (वर्तमान डीजीपी) राजीव कृष्ण शीरोज हैंग आउट कैफे पहुंचे। तब रुकैया ने अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने तत्कालीन पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। वर्ष 2023 में थाना एत्माद्दाैला में केस दर्ज कराया गया। केस की विवेचना अलीगढ़ ट्रांसफर कर दी गई। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी है। इसमें रुकैया पक्ष की ओर से जमानत का विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
मजबूत पैरवी से नहीं होने दी जमानत
रुकैया के मामले में मुकदमे की पैरवी सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि तेजाब पीड़िताओं के लिए विभिन्न कोष से 10 लाख रुपये तक के मुआवजे का प्रावधान है। रुकैया को रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष से धनराशि मिली है। अब प्रधानमंत्री क्षतिपूर्ति योजना में भी मुआवजा दिलाया जाएगा। केस के फैसले के बाद अलग से मुआवजा मिलता है। वह पीड़िता की हाईकोर्ट में पैरवी में भी मदद कर रहे हैं। यही वजह है कि आरोपी को दो साल बाद भी जमानत नहीं मिल सकी है।
परिवार के विरोध का करना पड़ा सामना
रुकैया ने बताया कि पिता चाैकीदारी करते थे। उनकी माैत के बाद भाई काम करने लगा। इससे ही घर का खर्च चलता था। मां फैक्टरी में काम करती थीं। उसी परिसर में परिवार रहता था। लोगों की मदद से इलाज कराया गया। तब वह ठीक हो सकी थीं। इलाज की वजह से छोटी बहन और भाई की पढ़ाई भी नहीं हो सकी। वह ठीक तो हो गईं, लेकिन काम करने की हिम्मत नहीं हो सकी। घटना के बाद लगता था कि आरोपी को कड़ी सजा मिले मगर परिवार की बंदिशों के कारण कुछ नहीं कर सकीं। एफआईआर कराने की बात कहने पर जीजा भी दबाव डालने लगे। बहन को घर से निकालने की धमकी दी। वर्ष 2010 में निकाह हो गया। तब भी काम नहीं कर पाईं। बाद में वह 2016 में शीरोज हैंग आउट कैफे में काम करने लगीं। अब उनका एक बेटा है। वह उसकी परवरिश में लगी हैं। मुआवजा मिलने से खुशी है। इस रकम को बच्चे की पढ़ाई में लगाएंगी।