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फर्जीवाड़े के आरोपी की जमानत को एक और फर्जीवाड़ा

Fri, 27 Feb 2015 01:54 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में फर्जी मार्कशीट प्रकरण में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। जेल में निरुद्ध आरोपी अनुज अवस्थी की जमानत के लिए कुलपति के नियुक्ति आदेश की कापी में फर्जीवाड़ा करके उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने का आरोप लगाया गया है। एसएसपी के आदेश पर हुई जांच के बाद थाना हरीपर्वत में अनुज, उसके पिता आनंद कुमार और साथी राजेश दुबे के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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दिल्ली गेट स्थित बागला कुंज निवासी डा. मनोज कुमार श्रीवास्तव विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान संस्थान में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। इसके अतिरिक्त उनकी नियुक्ति कुलपति के पीआरओ के पद पर 23 अगस्त 2014 को हुई। थाना हरीपर्वत में दर्ज कराई रिपोर्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि खंदारी परिसर डाटा सेंटर का संविदा कर्मचारी अनुज अवस्थी जेल में निरुद्ध है। अनुज और उसके पिता आनंद कुमार ने सात नवंबर 2014 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष जमानत प्रार्थना पत्र प्रेषित किया था। इसमें वादी डा. मनोज कुमार के पीआरओ बनाए जाने संबंधी नियुक्ति आदेश की फर्जी कापी का प्रयोग किया है। इसमें दर्शाया है कि अनुज उनके निर्देशन में कार्य करेंगे। इस फर्जी आदेश की कापी में डा. मनोज कुमार को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे 2011 के आगे के डाटा का संरक्षण कार्य अनुज से संपन्न कराएं, जबकि मूल नियुक्ति आदेश में लिखा है कि डा. मनोज को पीआरओ नियुक्त किया जाता है। वे सीधे कुलपति के निर्देशन में कार्य करेेंगे। इस आदेश में यूनिवर्सिटी के नाम, लेटर हेड और मुहर का भी गलत इस्तेमाल किया गया। पिता-पुत्र ने यह साबित करने का प्रयास किया कि अनुज अवस्थी सभी गलत काम उनके निर्देशन में करता था।
जिला एवं सत्र न्यायालय से प्रार्थना पत्र निरस्त होने के बाद अनुज अवस्थी के साथी राजेश दुबे ने हाईकोर्ट में शपथपत्र के साथ जमानत प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। इसमें भी फर्जी आदेश का प्रयोग किया गया। मामले में एसएसपी से शिकायत की गई। सीओ हरीपर्वत अशोक कुमार सिंह ने जांच की तो मामला सही पाया गया।
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नहीं मिल रहा पांच साल का रिकार्ड
यूनिवर्सिटी में फर्जी मार्कशीट प्रकरण की जांच डीआईजी की स्पेशल टीम कर रही है। पिछले दिनों जांच टीम ने पांच साल का रिकार्ड मांगा था, मगर अब तक नहीं मिल सका है। यह रिकार्ड जांच के लिए जरूरी है।
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