इसमें लिखे मोबाइल नंबर पर जब लोग कॉल करते हैं तो लोन दिलाने का आश्वासन दिया जाता है। इसके बाद कमीशन के रूप में 50 से 60 हजार रुपये जमा करा लिए जाते हैं। रकम लेने के बाद मोबाइल नंबर बंद कर लिया जाता है। इस संबंध में थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज किया गया।
इसके बाद साइबर सेल ने छानबीन शुरू की। इसमें पता चला कि अलीगढ़ निवासी विजय भाटी और लोहामंडी के नोबस्ता निवासी सोनिया उर्फ नेहा सरगना हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश, हरियाणा व पंजाब कई राज्यों में ऑफिस खोल रखे हैं। युवतियों को नौकरी पर रखते हैं।
लोन दिलाने का झांसा देकर करते हैं ठगी
आरोपी प्रधानमंत्री जनधन योजना के नाम पर लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करते हैं। ऑनलाइन पोर्टल के कर्मचारी को रकम देकर फर्जी आईडी और दस्तावेज की मदद से विभिन्न राज्यों में फर्जी विज्ञापन देते हैं। इसके बाद ठगी की जाती थी। गैंग के पास उन लोगों का भी डाटा होता था, जो लोग पूर्व में कहीं न कहीं लोन के लिए आवेदन कर चुके होते हैं। इन लोगों को भी युवतियां कॉल करके लोन का झांसा देकर ठगती थीं।
पुलिस ने रविवार को संजय प्लेस से सरगना समेत तीन युवतियों को गिरफ्तार किया था। सोमवार को तीनों को जेल भेज दिया। कार्रवाई करने वाली टीम में थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार, प्रभारी साइबर सेल एसआई सुल्तान सिंह, एसआई अनिल शर्मा, एसआई डेजी पवार, सिपाही जितेन्द्र ,विजय तोमर, बबलू कुमार, इंतजार आदि रहे।
सोनिया चला रही थी कॉल सेंटर
पुलिस ने बताया कि विजय भाटी ने आगरा की जिम्मेदारी सोनिया को दे रखी थी। कॉल सेंटर में उसके निर्देशन में ही काम होता था। आरोपी युवतियों के पास से सात मोबाइल, सात सिमकार्ड और सात रजिस्टर बरामद हुए हैं। रजिस्टर में लेन-देन का लेखाजोखा है।
विजय भाटी गैंग के सदस्य अनुज, मुकेश, लव कुमार, आनंद और नितिन के साथ अपनी हिस्सेदारी लेने आता था। गैंग के सदस्य अलग-अलग शहरों में किराये पर कमरा लेते हैं। रेंट एग्रीमेंट के आधार पर आईडी बनवाकर बैंक खाते खुलवाते हैं। मोबाइल सिम भी लेते हैं। गैंग ने किसी को भी लोन नहीं दिलाया था।
जस्ट डॉयल का कर्मचारी शामिल
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन पोर्टल जस्ट डॉयल पर फर्जी आईडी और दस्तावेज लगाकर विज्ञापन देते हैं। जस्ट डॉयल में तुषार नाम का एक कर्मचारी काम करता है। जो फर्जी विज्ञापन ऑनलाइन करने में गिरोह की मदद करता था। इसके लिए रकम भी लेता था। पूछताछ में उसका नाम सामने आया है। उसकी तलाश की जा रही है।
एटीएम से निकालते थे रकम
साइबर सेल ने गैंग को पकड़ने के लिए उन खातों की पहचान की, जिनमें रकम का हस्तानांतरण किया जा रहा था। इनमें अधिकांश खाते आगरा सहित अन्य राज्यों के जिलों की बैंकों के थे। इनमें रकम ट्रांसफर करके एटीएम से निकाली जा रही थी।