आगरा में चोरी और हत्या के एक मामले में 15 साल बाद सबूतों के अभाव में दो आरोपियों को बरी कर दिया गया। पुलिस न तो माल बरामद कर सकी और न ही आरोपियों की पहचान प्रक्रिया पूरी कर पाई, जिससे केस कमजोर हो गया।
आगरा में चोरी के दौरान महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में 15 साल बाद ठोस साक्ष्य के अभाव में एडीजे-1 पुष्कर उपाध्याय ने दो आरोपियों को बरी कर दिया। पुलिस न तो आरोपियों से माल बरामद कर सकी न ही गिरफ्तारी के बाद उनकी शिनाख्त कराई थी।
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थाना सैंया में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, गांव खेरागढ़ निवासी भोजराज ने तहरीर देकर बताया था कि 3 मई, 2010 की रात वह परिजन के साथ घर पर सो रहे थे। देर रात अज्ञात लोग घर के अंदर घुस आए। उनकी तीन बकरियां, पीतल के बर्तन व अन्य सामान चोरी कर लिया। खटपट की आवाज सुनकर उनकी पत्नी शकुंतला देवी (38) की नींद खुल गई। शोर मचाकर उन्होंने एक बदमाश को पकड़ लिया।
अन्य बदमाशों ने अपने साथी को घिरता देख शकुंतला को गोली मार दी। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद चोरी के सामान को वाहन में भरकर बदमाश ले गए। पुलिस ने विवेचना के दौरान अन्य मामलों में जिला बागपत के बड़ौत निवासी आरोपी प्रेम और किरावली निवासी महेश, लाला उर्फ वकील और कागारौल निवासी बीरी के घटना कबूल करने पर उनके खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान आरोपी बीरी सिंह की पत्रावली अलग कर दी गई। लाला उर्फ वकील की मौत हो गई थी।