कासगंज। जिले में गंगा नदी, काली नदी की धारा प्रवाहित है वहीं दो समानांतर हजारा नहर बहती हैं। इसके अलावा गोरहा नहर व अन्य बड़े रजबहा भी हैं। इनमें प्रतिवर्ष ही लोगों के डूबने के हादसे होते हैं, बावजूद इसके स्थायी तौर पर जिले में फ्लड यूनिट की तैनाती नही हुई है। स्नान पर्वों या बाढ़ आपदा के समय ही पीएसी की फ्लड यूनिट सहित एसडीएआरएफ व एनडीआरएफ की टीमें तैनात की जाती हैं। यदि पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 71 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी हैं। इनमें ट्रैक्टर-ट्रॉली के तालाब में डूबने से हुई 24 मौतों का आंकड़ा भी शामिल है।जिले के समीपवर्ती बदायूं जनपद के कछला गंगाघाट से जिले की सीमा लगती है। यहां भी श्रद्धालुओं के डूबने के हादसे अक्सर होते हैं। वहां भी पर्याप्त इंतजामों का टोटा है। गंगा नदी पर सर्वाधिक हादसे होते हैं। लहरा गंगा घाट, और पटियाली तहसील क्षेत्र में कादरगंज व अन्य इलाकों में श्रद्धालु स्नान को पहुंचते हैं और डूबने के हादसे का शिकार हो जाते हैं। जिले में कहीं भी श्रद्धालुओं के स्नान के लिए पक्के घाट नहीं हैं और जहां-तहां गंगा की तलहटी में पानी कम होने की स्थिति पर लोग बालू का खनन कर लेते हैं। जिससे बड़े-बड़े गड्ढे गंगा नदी व काली नदी में बन जाते हैं जो हादसे का कारण बनते हैं। समानांतर हजारा नहर के भगवंतपुर पुल, बिलरामपुल के आसपास रहने वाले लोग अक्सर नहर में स्नान करते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। पिछले दिनों सुन्नगढ़ी में कलश विसर्जन यात्रा में डूबने का हादसा हुआ। हादसे में भी श्रद्धालुओं की मौत हुई। सर्वाधिक डूबकर मौतें पिछले वर्ष 2023-24 में सत्र में हुई हैं। 51 लोगों की पिछले सत्र में डूबकर मौतें हुईं। 2024-25 का सत्र शुरू हुआ ही कि इस सत्र में भी 6 लोग दो हादसों में डूब चुके हैं।