हर 20 मिनट बाद, 20 फुट दूर, 20 सेकेंड तक देखें
आईएपी के अध्यक्ष डॉ. आरएन शर्मा ने कहा कि कोरोना काल में बच्चों में चिड़चिड़ापन, अवसाद बढ़ा है। कुछ बच्चे चंचल (हाईपर एक्टिव) तो कुछ गुमसुम हो रहे हैं। लैपटॉप, मोबाइल आदि से बच्चे भटक रहे हैं। इसे ‘डिजिटल आई स्ट्रेन इन किड्स’ कहा जा रहा है। अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि दो वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल से दूर रखा जाए, ताकि बच्चे का विकास प्रभावित न हो। दो से आठ वर्ष के बच्चे का स्क्रीन टाइम एक घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए। इसमें टीवी भी शामिल है। 20-20-20 का फार्मूला अपनाना चाहिए। स्क्रीन देखते समय हर 20 मिनट बाद, 20 सेकेंड तक 20 फुट दूर देखना चाहिए। हर एक घंटे बाद पांच मिनट के लिए टहलना चाहिए।
देश में 100 में से एक बच्चे को ऑटिज्म
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली की डॉ. मोनिका जुनेजा ने कहा कि ऑटिज्म की पहचान करना जरूरी होता है। ऐसे बच्चों में एडीएचडी से अलग लक्षण होते हैं। इस बीमारी में बोलना तो आता है पर किसे क्या बोलना है, यह पता नहीं होता। कई मरीज बोल नहीं सकते। सुनने में भी समस्या होती है। देश में 100 में से एक बच्चे को ऑटिज्म होता है। समय से लक्षण पहचानकर इलाज कराना चाहिए।
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