त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 35 मरीज ये समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि तेज धूप और अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणों के संपर्क में आने के बाद अचानक ठंडे वातावरण या एसी में जाने से शरीर की त्वचा प्रतिक्रिया करती है, जिससे स्किन एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है। लगातार पसीना आने और त्वचा गीली रहने से भी संक्रमण और एलर्जी बढ़ जाती है।
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डॉ. चाहर ने बताया कि लोगों को चाहिए कि वे मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें, सनस्क्रीन लगाकर ही बाहर जाएं। पसीना आए तो तुरंत पोछें। बच्चों पर गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। 15 से 20 बच्चे रोजाना घमौरियां, लाल दाने, खुजली और त्वचा में रैशेज की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। बच्चों को जरूरत से ज्यादा कपड़े न पहनाएं।
जहां-जहां त्वचा मुड़ती है जैसे कोहनी के अंदरूनी हिस्से, घुटनों के पीछे, गर्दन और जांघों के बीच विशेष सफाई और सूखापन बनाए रखें। देर तक पसीना जमा रहने से बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर चाहर ने सलाह दी है कि छोटे बच्चों को लगातार लंबे समय तक डायपर न पहनाएं। बीच-बीच में डायपर हटाकर त्वचा को खुली हवा लगने दें। त्वचा जितनी देर तक गीली रहेगी संक्रमण और रैशेज का खतरा उतना ही अधिक रहेगा।