सोरोंजी। मेला मार्गशीर्ष के अंतर्गत पिछले 106 वर्षों से शिवराज पशु मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला घोड़ा घोड़ी और ऊंटों की खरीद फरोख्त के लिए देशभर में प्रसिद्ध रहा है। अब ऊंटों का क्रेज न होने से ऊंट व्यापारी मेले में नहीं पहुंचते, लेकिन घोड़ा घोड़ी के व्यापारी बड़ी संख्या में अपने घोड़ा घोड़ी को लेकर पहुंचते हैं। शनिवार को शिवराज पशु मेले का नगरपालिका अध्यक्ष रामेश्वर दयाल महेरे एवं मेला प्रबंधक राव मुकुल मानसिंह ने ध्वजारोहण व पूजा अर्चना के बाद शुभारंभ किया।
मेला शुभारंभ के साथ घोड़ा घोड़ी की खरीद फरोख्त का सिलसिला शुरू हो गया है। नुकरी प्रजाति की बसंती घोड़ी जिसकी कीमत साढ़े सात लाख रुपये हैं वह लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र है। लोगों के बीच बसंती घोड़ी को देखने की होड़ नजर आई। वहीं चंबा प्रजाति की भूरी घोड़ी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। इस घोड़ी की कीमत भी करीब तीन लाख रुपये है।
मेले में उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल, पंजाब, जम्मू, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, एमपी , बिहार आदि प्रांतों के 500 से अधिक व्यापारी, पशुपालक अपने घोड़ा घोड़ी लेकर पहुंचे हैं। मेले में मारवाड़ी, काठियावाड़ी, सिंधी, चंबी, निकरा आदि नस्लों के 2500 से अधिक घोड़ा घोड़ी बिक्री के लिए आए हुए हैं। मेला प्रबंधक ने अतिथियों को शाॅल ओढ़ाकर व प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस दौरान नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी शैलेंद्र कुमार, आकाश महेरे, भोला तिवारी, योगेंद्र निर्भय आदि बड़ी संख्या में पशु व्यापारी मौजूद रहे।
मेले में घोड़े घोड़ियों से संबंधित सामान की आधा दर्जन दुकानें भी सजी हुई हैं। जिनमें काठी, लगाम, रकाब, पैड, नाल, ग्रूमिंग के लिए ब्रुश, खुर की सफ़ाई के औजार, कंबल, चादरें आदि बिक रहे हैं।