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Agra News: चार साल पहले रची थी जमीन कब्जाने की साजिश

Wed, 10 Apr 2024 04:17 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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आगरा। बोदला मार्ग पर बेशकीमती जमीन पर बिल्डर ही नहीं केयरटेकर के परिवार की सालों से नजर थी। चार साल पहले पूरा खेल रचा गया। नगर निगम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने से लेकर वारिसान और खतौनी में उमा देवी का नाम दर्ज कराने तक में रवि कुशवाहा गवाह बनता गया।
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उसके पिता और भाई की भी गवाही लगी। उमा देवी ने इसी आधार पर तत्कालीन एसओ सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा लिखवाकर वादी बन गई।
डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि टहल सिंह की जमीन पर रवि कुशवाहा सहित अन्य कब्जा करना चाहते थे। इसके लिए पूरा खेल रचा गया था। पहले वो पीड़ित था। मगर, फर्जीवाड़े में उसकी संलिप्तता साबित हो गई। एसआईटी ने कई स्तर पर जांच की। इसके बाद सच सामने आ गया।
पता चला कि वर्ष 2012 में टहल सिंह ने अपने भाई अमर सिंह की मृत्यु पर उनका नाम हटवाकर अपना नाम तहसील में वाद दायर कर दर्ज कराया। उधर, टहल सिंह का मृत्यु प्रमाणपत्र 4 जुलाई 2019 को आवेदन कर बनवाया गया। इसमें उनकी मृत्यु 8 मार्च 2008 को होना दर्शाया गया। मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किशन मुरारी ने किया था।
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उसने खुद को टहल सिंह का भतीजा साबित किया था, जबकि वह केयरटेकर रवि कुशवाहा का चचेरा भाई है। मृत्यु प्रमाण के लिए जांच में दीनानाथ, उसके बेटे रवि कुशवाहा ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए। आवेदन के साथ श्मशान घाट पर खरीदी लकड़ी की रसीद और किशन मुरारी का शपथपत्र भी लगाया।
एसआईटी की जांच में टहल सिंह का वोटर कार्ड, गवाहों के पहचानपत्र, रवि-किशन मुरारी के आधार कार्ड की काॅपी तक फर्जी निकली। दीनानाथ की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद जमीन हथियाने के लिए टहल सिंह के वारिस के लिए जसवीर के नाम से आवेदन कराया गया। इसमें रवि सहित अन्य फर्जी गवाह बन गए।

टहल सिंह के बेटे के रूप में जसवीर को दर्शाया गया था। जसवीर के नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए उमा देवी ने 9 नवंबर 2021 को नगर निगम में आवेदन किया। आवेदन में लकड़ी और अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य सामग्री की फर्जी रसीद लगाई। इसमें गवाही शंकरलाल उर्फ शंकरिया और उसके भाई रवि कुशवाहा ने दी। उन्होंने उमा देवी के जसवीर की पत्नी होने की गवाही के रूप में हस्ताक्षर किए, जबकि जसवीर टहल सिंह का पुत्र नहीं था। वह साला था। जसवीर की मृत्यु 23 दिसंबर 2009 को हुई थी। टहल सिंह ने अपने बयान में प्रमाण दिए। इसके साथ ही नगर निगम के दस्तावेज भी मिले।

उमा देवी ने मृत्यु और वारिसान प्रमाणपत्र बनने के बाद तहसील में वाद दायर किया। इसमें खतौनी में अपना नाम दर्ज कराया। इसमें गवाह वही थे, जो पहले बने थे। तहसीलकर्मियों ने बिना ठोस जांच के उमा देवी का नाम खतौनी में दर्ज कर दिया। इस आधार पर ही उमा देवी ने थाना जगदीशपुरा में फर्जी मुकदमे दर्ज कर जेल भेजने के मामले में तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया।


एसआईटी की जांच में सामने आया कि टहल सिंह ने 18 नवंबर 2016 को ओरियल इन्फ्राटेक एलएलपी के साझीदार मैनपुरी निवासी प्रियांशु यादव को भूमि का बैनामा किया था। इस पर 29 मार्च 2017 को टहल सिंह के खिलाफ थाना शाहगंज में मुकदमा दर्ज कराया गया। वादी विनीत कुमार यादव ने आरोप लगाया कि टहल सिंह ने जमीन का सौदा उनसे किया था, लेकिन बाद में जमीन प्रियांशु यादव को बेच दी। इस प्रकरण में टहल सिंह ने वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में रिट दायर की। इससे पुलिस को टहल सिंह के जीवित होने के प्रमाण मिले। नेम कुमार जैन वर्ष 1973 से 1980 तक टहल सिंह के साथ जमीन पर व्यापार करते थे। पुलिस ने नेम सिंह के बयान लिए। फोटो के आधार पर उन्होंने टहल सिंह को पहचान लिया।
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