ताजगंज के गांव नगला पैमा में मंगलवार तड़के 3 बजे बैटरी फटने से घर में आग लग गई। दिव्यांग पति लपटों में घिर गया। घर से निकल नहीं पा रहा था। पत्नी ने लपटों के बीच से उसे बचाया और घर से बाहर निकाल दिया। इस दौरान वह बुरी तरह से झुलस गई। ग्रामीणों ने आग बुझाकर उनको बाहर निकाला। मंगलवार दोपहर को पत्नी की मौत हो गई। एसएन इमरजेंसी में पति की हालत गंभीर है। आसपास के लोगों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने में देरी होने के कारण महिला की मौत हो गई।
नगला पैमा निवासी किशन उर्फ मधुआ (45) पत्नी गीता (40) के साथ एक कमरे के घर में रहते हैं। इलाके के पूर्व पार्षद जगमोहन सिंह ने बताया कि कुछ साल पहले ट्रेन हादसे में किशन के दोनों पैर कट गए थे। वह बैटरी रिक्शा चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहा था। आसपास के लोगों ने बताया कि मंगलवार तड़के करीब 3 बजे ई-रिक्शा की दो बैटरी में शाॅर्ट सर्किट से धमाका हुआ और आग लग गई। अनुमान है कि बैटरी चार्जिंग के दौरान शाॅर्ट सर्किट हुआ।
दिव्यांग होने के कारण किशन चारपाई से नहीं उठ सका। गीता पति को बचाने में जुट गई। लपटों से घिरे पति को उन्होंने किसी तरह बाहर निकल दिया लेकिन खुद फंसकर रह गईं। आसपास के लोगों ने बिजली आपूर्ति बंद करके आग बुझाई। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस मंगवाई। लेकिन ताजमहल के पूर्वी गेट से रास्ते पर प्रतिबंध होने के कारण एंबुलेंस को आने में वक्त लग गया।
इधर सूचना पर दमकल कर्मी भी पहुंच गए थे। एंबुलेंस पहुंचने पर दोनों को इलाज के लिए एसएन इमरजेंसी ले जाया गया। मंगलवार दोपहर को गीता ने दम तोड़ दिया। किशन का इलाज किया जा रहा है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
आसपास के लोगों ने बताया कि किशन का इकलौता 16 वर्षीय बेटा भी कमरे में ही सोता था।लेकिन हादसे के समय घर के पास छप्पर में अपने चाचा के साथ सो गया था। इस कारण बेटे की जान बच गई।
आगरा। घटना के बाद नगला पैमा के ग्रामीणों में रोष है। उनका कहना है कि ताजमहल के पूर्वी गेट की ओर से वाहन निकलने की अनुमति नहीं है। चारपहिया वाहनों को 8 किमी घूम कर निकलना पड़ता है। किसी तरह की अनहोनी पर लोग दोपहिया वाहन पर ही मरीज को ले जा सकते हैं। कई बार इसके चलते इलाज में देरी हो जाती है। अगर एंबुलेंस समय पर आ जाती तो शायद गीता की जान बचाई जा सकती थी।