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मौत के दो कमरों में फंसी 12 जानेेेें, पड़ोसी बने फरिश्ता

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आगरा। रंजिश की आग में छोटेलाल का पूरा परिवार जिंदा जल जाता। बस्ती के लोग फरिश्ता बनकर आए। घर में लपटों से घिरे परिवारवालों को निकालने में जुट गए। दो कमरों के मकान में बच्चों को मिलाकर 17 लोग हैं। अग्निकांड के समय कमरों में 12 जिंदगी बंद थीं। बाहर निकलने का भी कोई रास्ता नहीं था। भयावह मंजर देख सभी के रोंगटे खड़े हो गए। फिर भी लोगों ने हिम्मत दिखाई। जिंदगियों को बचाने के लिए पूरी बस्ती एकजुट हो गई।
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राजनगर में छोटेलाल का दो कमरों का छोटा सा मकान है। इसमें छोटेलाल की पत्नी चार बेटे, बहुएं, नाती और नातनी रहते हैं। बाहर के कमरे के दरवाजे के बगल में खिड़की बनी हुई है। युवक ने ज्वलनशील पदार्थ (पेट्रोल बताया जा रहा) डालने के बाद बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी। कुछ ही देर में आग विकराल हो गई। पूरी बस्ती के लोग जाग गए। पड़ोस में रहने वाले रोहित, दिनेश, विजेंद्र, राम सिंह संगलिया आदि ने पहुंचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। आग में झुलसे हुए बच्चों को गोद में उठाकर बाहर निकाला। एंबुलेंस न पहुंचने पर कुछ लोग एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी पहुंचे, लेकिन एंबुलेंस भेजने से मना कर दिया गया।
दिनेश ने बताया कि बजाजा कमेटी के आफिस भेजा गया। उसके कार्यालय पर काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई नहीं आ सका। सूचना पर पहुंची फायरब्रिगेड की गाड़ी में घायलों को एसएन इमरजेंसी ले जाया गया।
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... और बच गया मासूम मोहित
बस्ती के लोगों ने बताया कि मासूम मोहित अपने बाबा के साथ छत पर सो रहा था। अमूमन वह अपनी मां के साथ ही सोता था। बिजली आने पर वह परिवार के साथ अंदर नहीं गया। अगर, वह भी अंदर जाता तो आग से झुलस सकता था।

कंबल गीला कर बचाई बच्चों की जान
परमानंद के कमरे से आग की लपटें सोनू के कमरे तक पहुंच चुकी थी। कूलर चालू होने से कमरे में घुटन हो गई। सोनू ने पत्नी नीतू और बच्चों को बचाने के लिए कंबल को गीला किया और उसमें सभी को लपेट दिया। इसके कुछ ही देर बाद आग बुझा ली गई।

सिलेंडर फटता तो भयावह होता मंजर
परमानंद और सोनू के कमरे में सिलेंडर थे। किचन भी कमरों में ही है। परामनंद के कमरे में रखे सिलेंडर के पाइप में आग लग गई थी। आग बुझा रहे लोगों की नजर गई तो उन्होंने हिम्मत करके सिलेंडर से रेग्यूलेटर को झट से निकाल दिया। इसके बाद सिलेंडर को बाहर निकाला। अंदर वाले कमरे में रखे सिलेंडर तक आग नहीं पहुंच सकी। इस कारण वह बच गया।

छोटेलाल की जुबानी
छोटेलाल का आरोप है कि शाहगंज की एक युवती छोटे बेटे सनी से शादी करना चाहती है। एक साल से वह शादी की जिद पर अड़ी है। सात दिन पहले वह घर पर आ गई थी। उसे किसी तरह समझाबुझाकर भेजा था। सोमवार को भी वह घर पर आ गई थी। युवती के परिवारीजन पहुंच गए थे। उन्होंने धमकी दी थी। मंगलवार की शाम को लड़की का भाई घर आया था। उसी ने ज्वलनशील पदार्थ डालकर परिवार को जिंदा जलाने की कोशिश की। वहीं पुलिस का कहना है कि युवती घर से लापता है। माना जा रहा है कि सनी लड़की को लेकर भागा है। तहरीर नहीं मिली है।

वर्जन
आग लगाई गई या फिर किसी कारणवश लगी, जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फारेंसिक एक्सपर्ट ने घटनास्थल से नमूने लिए हैं। जांच रिपोर्ट मंगाई गई है। अगर परिवार की ओर से किसी के खिलाफ तहरीर दी जाती है तो कार्रवाई की जाएगी।
- शैलेष कुमार पांडेय, एएसपी लोहामंडी


तीन बच्चों की जलने से मौत हुई है। दो लोगों को दिल्ली रेफर किया गया है। दो बच्चे एसएन के सर्जिकल वार्ड में भर्ती हैं। सीएफओ की जांच में आग लगने का कारण प्रथम दृष्टया गैस रिसाव और शार्ट सर्किट बताया जा रहा है। घटनास्थल से पेट्रोलियम पदार्थ से आग लगने के पुख्ता प्रमाण नहीं मिले हैं।
- सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, एसपी सिटी


आरोपी के पिता से पूछताछ शुरू
पेट्रोल डालने के आरोपों की जांच पुलिस ने शुरू कर दी है। यही वजह है कि पुलिस ने आरोपी युवक के पिता को घर से उठा लिया। उससे पूछताछ की जा रही है।


इलाज के लिए एक-एक पैसे के लिए मोहताज
छोटेलाल जैसे-तैसे परिवार का पेट पाल रहे हैं। उसके बेटे भी होटलों में काम करते हैं। आग में झुलसे बच्चों को देखकर वह सुधबुध खो बैठे। घर की सारी जमा पूंजी भी जल गई। उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे की बच्चों का इलाज ठीक से करा पाए। बस्ती के लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए। रोहित ने बताया कि राम सिंह संगलिया ने बस्ती के लोगों से रकम जुटाना शुरू कर दिया। यहां तक कि अपने साथियों के जलने की बात सुनकर बस्ती के कई बच्चों ने भी अपनी गुल्लक तोड़ डाली।

हादसा है या साजिश, उलझी गुत्थी
घर में आग लगने के पीछे छोटेलाल और उसके परिवारवाले रंजिश बता रहे हैं, लेकिन पुलिस यह मानने को तैयार नहीं है। पुलिस हादसा भी मान कर जांच कर रही है। फोरेंसिक टीम ने कपड़ों से लेकर अन्य सामान के सैंपल लिए हैं।

जांच के बिंदु
1. कपड़ों के ऊपर से किसी भी ज्वलनशील पदार्थ की दुर्गंध नहीं, तो फिर आग कैसे लगी?
2. घर में रखा सामान पूरी तरह से नहीं जला। परिवार के लोग ही आग की चपेट में आए।
3. केमिकल और पेट्रोलियम पदार्थ डाला गया होता तो दुर्गंध जरूर आती।
4. विद्युत उपकरण और गैस सिलेंडर एक ही कमरे में रखे हुए थे। गैस लीकेज भी नहीं।
5. सिलेंडर का पुराना पाइप जला हुआ था। उसकी आग लोगों ने बुझाई।
6. पेट्रोल से भीगे कपड़ों पर पानी डालने से आग नहीं फैल सकती।
7. घर में लगे बिजली के तार कहीं-कहीं जले हुए मिले हैं।

लोगों की जुबानी
1. पानी डालने पर भी आग बढ़ती गई।
2. पेट्रोल छिड़का गया, तभी पूरा परिवार आग की चपेट में आया।
3. बालू डालने के बाद ही आग को काबू मेें किया जा सका।
4. और कोई कारण होता तो आग धीरे-धीरे बढ़ती। परिवार को बाहर निकलने का मौका मिल सकता था।


एंबुलेंस सेवा की खुली पोल
न सरकारी मदद मिली न ही प्राइवेट
फायरब्रिगेड की गाड़ी से पहुंचाया अस्पताल
आगरा। अग्निकांड की घटना ने सरकारी एंबुलेंस सेवा की भी पोल खोलकर रख दी। बस्ती के लोग सरकारी और संस्था की एंबुलेंस के लिए इधर से उधर भटकते रहे, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। फायरब्रिगेड के अफसर ने अपनी जीप से आग से झुलसे लोगों को एसएन मेडिकल कालेज अस्पताल पहुंचाया।
बस्ती के लोगों ने बताया कि कमरे से बाहर निकाले गए घायल गली में पड़े हुए थे। एंबुलेंस की मदद लेने के लिए एसएन इमरजेंसी तक दौड़ लगाई। लेकिन यहां पर एंबुलेंस वालों ने बिना किसी आदेश के जाने से इंकार कर दिया। जब वह एक संस्था के कार्यालय पर गए तो वह भी बंद था। काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन बाहर कोई नहीं निकला। उन्हें मायूस लौटना पड़ा। इस कारण से इलाज में देरी हो गई। एंबुलेंस नहीं मिली तो फायरब्रिगेड की गाड़ी ही मददगार बन गई।
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