बाह। जूनियर हाईस्कूलों में खाद्यान्न का आवंटन न होने से मिड-डे-मील की रसोई के दरवाजे बंद हो गए हैं। बाह, पिनाहट, जैतपुर, के तकरीबन 150 स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चे भूखे पेट घर लौट जाते हैं। प्रधानाध्यापकों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
सुबह 10 से शाम चार बजे तक परिषदीय स्कूलों में कक्षाएं लग रही हैं। ऐसे में बाह, पिनाहट, जैतपुर ब्लाक के तकरीबन 150 जूनियर हाईस्कूलों में मिड-डे-मील की रसोई पर ताला लटक जाने के कारण बच्चों को भूखे पेट पढ़ाई करनी पड़ रही है। बाह ब्लाक के 48 जूनियर हाईस्कूलों में मिड-डे-मील न बनने की वजह जानने की कोशिश अमर उजाला ने की, तो अधिकांश प्रधानाध्यापकों का एक ही जवाब था कि खाद्यान्न न मिलने के कारण मिड-डे-मील बंद पड़ा है। अपनी जेब से आखिर कब तक खाना बनवाएं ? यही स्थिति पिनाहट और जैतपुर ब्लाक के स्कूलों की है। बताते चलें कि डीएम की समीक्षा बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने धनराशि का भुगतान विभाग द्वारा न किए जाने पर मिड-डे-मील का खाद्यान्न लैप्स होने की जानकारी दी थी, जिसकी सजा स्कूली छात्र-छात्राओं को भुगतनी पड़ रही है। तमाम प्राइमरी स्कूलों में भी मिड-डे-मील की रसोई ठंडी पड़ी है। प्राइमरी स्कूलों में गेहूं की खेप तो पहुंच गई लेकिन चावल की खेप नहंी आई है।
= मिड-डे-मील खाद्यान्न की डिमांड भेज दी गई है। सभी प्रधानाध्यापकों का मिड-डे-मील बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। रिमाइंडर भेजकर खाद्यान्न आवंटन की जानकारी की जा रही है।
- ललित मोहन पाल, खंड शिक्षाधिकारी, बाह