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मेले में दिखा सेना का रंग

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आगरा। सरहद सुरक्षा करने वाले जवान मंद मुस्कुराहट के साथ लोगों से मिल रहे थे। रोमांचक खेलों के जरिये लोगों का दिल जीत रहे थे। डांस, खेल और हथियारों की प्रदर्शनी अनायस ही अपनी ओर आकर्षित कर रही थीं। जवानों की मीठी बातें माहौल को खुशनुमा बना रही थीं।
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दिवाली के उपलक्ष्य में हर साल लगने वाले पांच दिवसीय मेले का शुभारंभ शनिवार को मंडलायुक्त मनजीत सिंह ने सैन्य जीत सिंह स्टेडिम में किया। कार्यक्रम की शुरुआत पैरा सेलिंग और हवाई करतब के साथ हुई। इस दौरान मंच पर स्टेशन कमांडर संजय सिंह, आशा स्कूल की प्रिंसिपल अमनदीप धालीवाल, कर्नल रनजीत सिंह आदि मौजूद रहे।


आशा स्कूल को आर्थिक सहायता
इस मेले के जरिये होने वाली आय से आशा स्कूल की आर्थिक मदद की जाती है। बता दें कि आशा स्कूल सेना के जवानों की पत्नियां मिलकर चलाती हैं। इसका मकसद शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों को आगे बढ़ाना है।
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किसलिए राधा जले...
हजारों लोगों की भीड़ और रंग बिरंगे मंच पर बच्चों की प्रस्तुति कार्यक्रम को भव्य बना रही थी। पहले आशा स्कूल के बच्चों ने ‘बम-बम भोले...’, ‘डिस्को दिवाने...’ आदि गानों पर महमोहक प्रस्तुति दी। छोटे बच्चों की अदा लोगों को आकर्षित कर रही थी।

...और घुसने लगे टैंकर में
फिल्मों और सेना मुख्यालय में देखे जाने वाले हथियारों को लोग न सिर्फ देख और छू रहे थे बल्कि जवान लोगों को मशीनगन, टैंकर, एके-47 आदि की पूरी जानकारी दे रहे थे। टैंकर में लोग अंदर घुसकर भी देख रहे थे। यहां हथियारों के साथ फोटो खिंचवाने में भी मनाही नहीं थी।

झूले बेमिसाल
लंबे, गोल और नावनुमा झूलों का बच्चे और बड़े लुत्फ उठा रहे थे। किफायती टिकट और सुरक्षित झूलों पर झूलने के लिए लाइन लगी थी।

...और खेलों ने जीत लिया दिल
मेले में हर स्टाल पर कुछ न कुछ मनोरंजक खेल चल रहा था। कहीं फुटबाल से गिलासों की मीनार गिराने पर 50 रुपये दिए जा रहे थे, तो कहीं डंडी के सहारे धागे से बंधे छल्ले में बीयर या फ्रूट की बोतल फंसाने पर मुफ्त में दी जा रही थी। कहीं निशानेबाजी पर तो कहीं छल्लों को किसी भी सामान के अंदर फंसाने पर सामान मुफ्त में बांटा जा रहा था।
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