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‘मुन्नाभाई’ को एमबीबीएस कराने का खेल

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विवि में मेडिकल के फर्स्ट और फाइनल के छात्रों के चार्ट में हेराफेरी
बैक को खत्म करने के लिए चल रही सौदेबाजी
प्रोफेशनल कोर्स के चार्ट न मिलने से उठे सवाल

आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में ‘मुन्नाभाई’ को एमबीबीएस कराई जा रही है। एमबीबीएस के फर्स्ट और फाइनल प्रोफेशनल में बैक लगने वाले छात्रों के साथ सौदेबाजी की जा रही है। चार्ट में हेराफेरी कर पास किया जा रहा है। चार्ट रूम में प्रोफेशनल कोर्स के चार्ट न होने से सवाल उठने लगे हैं।
एमबीबीएस, बीएएमएस और बीडीएस कर रहे छात्रों की फर्स्ट प्रोफेशनल और फाइनल प्रोफेशनल में बैक (50 प्रतिशत से कम अंक आने पर) लगने पर छह महीने अतिरिक्त पढ़ाई करनी होती है। ऐसे में छात्र विवि के कॉकस के नजदीक किसी न किसी माध्यम से पहुंच जाते हैं। इसके साथ ही सौदेबाजी का खेल शुरू हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल कालेज में बैक लगने वाले छात्रों की संख्या होती है, इनके नाम नहीं होते हैं। ऐसे में कॉकस चार्ट में हेराफेरी कर बैक वाले छात्रों को पास करा देता है। वहीं पास हो रहे छात्रों की बैक लगा देता है। इसके लिए 25 से 50 हजार रुपए प्रत्येक विषय के लिए जा रहे हैं।
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बीएड मामले में चार्ट रूम खंगालने पर डिप्टी रजिस्ट्रार प्रभाष द्विवेदी, असिस्टेंट रजिस्ट्रार अनिल शुक्ला और प्रोफेसर राजेश धाकरे को प्रोफेशनल कोर्स के चार्ट नहीं मिले। एमबीबीएस, बीएएमएस, बीडीएस, लॉ, बीबीए, बीसीए सहित अन्य प्रोफेशनल कोर्स के चार्ट न मिलने पर इसकी जांच पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रोफेशनल कोर्स के चार्ट कर्मचारियों के कब्जे में रहते हैं। सेक्शन में चार्ट को रखने के नाम पर घर पर भी ले जाया जाता है।
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2001 में खुला था मामला
बताया जा रहा है कि वर्ष 2001 में एसएन मेडिकल कालेज के एक छात्र को पास की मार्कशीट जारी की गई। फाइनल प्रोफेशनल का रिजल्ट आने के तीन दिन में मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। छात्र का रजिस्ट्रेशन भी हो गया, लेकिन डिग्री बनाते समय चार्ट में छात्र के फेल होने पर होश उड़ गये।
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