जमीन के अभाव में कई योजनाओं पर लग चुका है विराम
महंगी जमीन के चलते उद्यमी खींच लेते हैं हाथ
100 एकड़ के लेदर कंपोनेंट पार्क की योजना लैप्स
सस्ती जमीन दिलाने के लिए कई बार लगाई गुहार
आगरा। भले ही केंद्रीय उद्योग मंत्रालय आगरा को मेगा लेदर क्लस्टर योजना देने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है लेकिन महंगी जमीन उद्यमियों को सपनों पर पानी फेर सकती हैं। कई बार जमीन के अभाव के चलते महत्वाकांक्षी योजनाओं से हाथ धो बैठे आगरा के फुटवियर निर्यातक इस बार भी जमीन की व्यवस्था करने को लेकर आशंकित हैं। इससे पहले भी आगरा के हाथ से 100 एकड़ का महत्वाकांक्षी लेदर कंपोनेंट पार्क जमीन की व्यवस्था ना होने पाने से निकल चुका है। वह भी तब जब कई बार सरकार से गुहार लगाई जा चुकी है।
बताते चलें कि आगरा में 65 एकड़ में बनने वाले मेगा लेदर क्लस्टर के लिए उद्योग मंत्रालय सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। इस योजना में उद्यमियों को भी अपना अंशदान देना है। उद्यमियों का अंशदान जमीन के रूप में माना जाएगा। यही एक बिंदु सवा अरब के इस प्रोजेक्ट में अड़ंगा डाल रहा है। महंगी जमीनें इस बार आगरा से मेगा लेदर क्लस्टर छीनने की तैयारी में है। सूत्रों की मानें तो उद्यमियों ने क्लस्टर के लिए जमीन देख ली है। लेकिन जमीन की कीमतें सुनकर उद्यमियों की पेशानी पर पसीना है। पूर्व में राज्य सरकार से कई बार सस्ती दरों में जमीन दिलाने की मांग कर चुके जूता उद्यमियों ने वर्तमान राज्य सरकार से गुहार लगाई है। 65 एकड़ में बनने वाले इस क्लस्टर में उत्पादन इकाइयों के साथ सीपीटी, टेस्टिंग लैब, डिजाइनिंग स्टूडियो, प्रदर्शनी हाल, कन्वेंशन सेंटर आदि भी होगा।
जमीन के लिए आगरा के उद्यमी एक बार फिर राज्य सरकार को प्रस्ताव देने जा रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि इतनी महत्वाकांक्षी परियोजना को हाथ से नहीं जाने दिया जा सकता है। उद्यमी भी अपना अंशदान दे रहे हैं, राज्य सरकार को भी इस योजना में मदद करनी चाहिए। एफमेक के पूर्व अध्यक्ष कैप्टन एएस राणा का कहना है जमीन के अभाव में कई योजनाओं से हाथ धोना पड़ा है। राज्य सरकार को इस योजना के लिए आगे आना चाहिए।