एटा। जिले में बढ़ते जा रहे बंदरों के आतंक पर लगाम लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है। आईजीआरएस और अन्य माध्यमों से आ रही बंदरों के आतंक की शिकायत पर प्रशासन ने संज्ञान लिया है। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग ने मथुरा की कार्यदायी संस्था को नामित करते हुए 15 दिन में बंदर पकड़ने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, जिले में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। नगर क्षेत्र के साथ-साथ जिले के पिलुआ, अवागढ़, जलेसर क्षेत्र में बंदरों की खासी तादाद है। पिलुआ मेें लोग आए दिन हादसों के शिकार होते हैं। जबकि जलेसर और अवागढ़ में बंदरों के हमले के चलते कई मौतें हो चुकी हैं। पिछले दिनों जिले में तमाम लोगों ने आईजीआरएस पर शिकायत की। जिसके बाद प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग संजीव कुमार शर्मा ने मथुरा की मैसर्स बिलाल का. ट्रेडर्स को बंदर पकड़ने की अनुमति दी है। संस्था को 15 दिन में जिले से बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना है। इसके लिए संस्था को करीब 12 शर्तों के साथ काम को पूरा करने का जिम्मा सौंपा गया है।
अवागढ़-जलेसर में आतंक से दहशत
जिले के जलेसर क्षेत्र के बाजार और हनुमानगंज स्थित हनुमान मंदिर पर हर मंगलवार को भक्तों से ज्यादा बंदरों के झुंड नजर आते हैं।
चंदा कर पकड़वाए थे बंदर
पिलुआ क्षेत्र में बंदरों के आतंक को देखते हुए लोगों ने दो साल पूर्व डीएम अजय यादव से गुहार लगाई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मगर जब आतंक बढ़ा, तो लोगों ने खुद चंदा करके 70 हजार रुपये एकत्र किए और किसी निजी मदारी से बंदरों को पकड़वाया।