एटा/जैथरा। गर्मी से गला सूख रहा है और पानी के लिए आठ हजार परिवार तरस रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर खड़ी की गईं पेयजल परियोजनाएं भी लोगों के लिए बवाल-ए-जान बन गई है। सुबह से पानी के लिए जंग शुरू होती है और कतारों के बीच लोग हैंडपंपों से पानी भरकर काम चलाते हैं। गांव में बना ओवरहैड टैंक 13 साल बाद भी अपनी बदहाली पर आसूं बहा रहा है। पढ़िए रिपोर्ट...
13 साल बाद भी बदहाली
जैथरा विकासखंड की ग्राम पंचायत धुमरी में वर्ष 2005 में करोड़ों रुपये खर्च कर पेयजल परियोजना का निर्माण कराया गया। तत्कालीन प्रधान श्यामपाल सिंह चौहान के प्रयास से तत्कालीन कैबिनेट मंत्री अवधपाल सिंह यादव की निधि से पंचायत क्षेत्र के गांव गांगूपुरा में ग्राम सभा की जमीन पर ओवरहेड टैंक बनवाया गया।
इसके लिए जलनिगम ने टैंक से एक किलोमीटर दूर धुमरी चौकी के पास दो नलकूप बनवाए। साथ ही धुमरी पंचायत के दस गांव के लोगों को पेयजल मुहैया कराने के लिए करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में खेतो और सड़क के किनारे पाइप लाइनें बिछाई गईं। लोगों को लगा था अब पानी की समस्या खत्म होगी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। पहले ही दिन पानी की सप्लाई के दौरान पूरी पाइप लाइन फट गई। गागूंपुरा में बना ओवरहेड टैंक लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है।
गांव में हैंडपंपों की किल्लत
ग्राम पंचायत के दस गांवों में हैंडपंपों की किल्लत है। सबसे ज्यादा पानी की मारामारी गांव नगरिया में है। यहां निजी नल पर सुबह से पानी भरने को कतारें लगती हैं।
इन दस गांवों में पेयजल संकट
धुमरी, नगला ठेका, नगला खंजन, गांगूपुरा, नगरिया, नगला मोहन, नगला जालिम, नगला कमले, नगला फूल शाह, नगला सुखवीर। क्षेत्र में 20 हजार की आबादी के साथ 12 हजार मतदाता हैं।
जिम्मेदारों की सुनिए
मैं जैथरा ब्लाक के तहत आने वाले सभी पानी के टैंकों के नलकूपों को देख रहा हूं। धुमरी के गांव गांगूपुरा का नलकूप ग्राम पंचायत को पहले ही हैंड ओवर कर दिया है। जिसकी पाइप लाइन फट गई है। वही टैंक में पानी भरने वाले दोनों नलकूप खराब पड़े हैं।
कमल सिंह, कर्मचारी जल निगम, जैथरा
साल 2010 में कई जिला अधिकारियों ने प्रधानों की बैठक कर ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई सुचारू करने के लिये जल निगम को निर्देश दिये। जो हवा हवाई हो गए। उस समय पानी के टैंक वाले गांव के प्रधानों को इंडिया मार्का नल लगाने अनुमति नहीं थी।
- कालीचरन शाक्य, पूर्व प्रधान धुमरी
ग्राम पंचायत के सभी गांव में पानी के लिये पाइप लाइनें बिछायीं गई थीं। जल निगम की उदासीनता के चलते धुमरी पंचायत के किसी गांव में पानी के कनेक्शन नहीं हुएं। पानी की टंकी के दोनों नलकूप शुरू से ही खराब पड़े हैं। वहीं पाइप लाइनें भी ध्वस्त हैं।
- भूपेन्द्र सिंह यादव, वर्तमान प्रधान, धुमरी।
हमारे घर के करीब तक पानी की टंकी की पाइप लाइन बिछी है। उस समय हमें उम्मीद थी कि अब हमें टंकी का पानी जल्दी मिल जायेगा। अन्त में लेकिन निराशा ही हाथ लगी।
- डॉ. हरीबाबू बेताव, स्थानीय
गांव में इंडिया मार्का नलों की भारी कमी है। पानी की टंकी के नाम से सरकार का करोड़ों रुपया बरबाद हो गया। फिर भी टंकी का पानी गांव तक नहीं आया। हमारे गंांव नगरिया में निजी नलों पर लाइन से पानी लेना पड़ता है।
- सुरजीत चौहान, ग्रामीण।
ये हैं आंकड़े
2005 में हुआ था ओवरहेड टैंक का निर्माण
10 गांवों में पेयजल संकट
05 किमी क्षेत्र में फैली है पाइपलाइन
13 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका टैंक