मैनपुरी। जिले में दो साल से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे जिला अस्पताल पहुंचने वाले हृदय रोग के मरीजों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। परेशान मरीजों को सैफई, फिरोजाबाद तथा आगरा के लिए रेफर किया जा रहा है। इससे मरीजों को आर्थिक नुकसान के साथ ही शारीरिक व मानसिक रूप से भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सर्दी के मौसम में हृदय रोग के मरीजों की संख्या और भी बढ़ जाती है। वर्तमान में 70 से 80 हृदय रोग के मरीज जिला अस्पताल में प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। जिन्हें फिजीशियन प्रथम उपचार देने के बाद रेफर कर रहे हैं। जनपद में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मरीजों को निजी डॉक्टर के यहां ले जाना पड़ता है।
जनपद में हृदय रोग के निजी डॉक्टर भी गिने चुने हैं। इससे वे मरीजों से मनमानी धनराशि वसूलते हैं। इनके पास उपचार के लिए रुपये नहीं होते हैं उन्हें सैफई व आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को शारीरिक रूप से परेशानी होने के साथ ही मानसिक परेशानी भी उठानी पड़ती है।
जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। जिससे यहां आने वाला स्टाफ मुफ्त में ही 2.45 लाख रुपये का वेतन ले रहा है। हृदय रोग विभाग में ईसीजी टेक्नीशियन, दो स्टाफ नर्स, एक वार्ड ब्वाय तैनाती है। डॉक्टर की तैनाती न होने के कारण इनके पास कोई काम नहीं रहता है। इन्हें बैठे का ही वेतन दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे जनपद में हृदय रोग के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद ही रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में कई मरीज ऐसी स्थिति में आते हैं जिन्हें तुरंत उपचार की जरूरत होती है। सैफई या आगरा ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। औसतन रेफर 10 मरीजों में से तीन की रास्ते में ही मौत हो रही है।
सीएमएस डॉ. आरके सागर ने बताया कि शासन और विभाग को कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन यहां हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है। एकबार फिर से पत्र भेजा जा रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीजों को वास्तव में परेशानी उठानी पड़ रही है।